ghazalKuch Alfaaz
आँख की खिड़कियाँ खुली होंगी दिल में जब चोरीयाँ हुई होंगी या कहीं आइने गिरे होंगे या कहीं लड़कियाँ हँसी होंगी या कहीं दिन निकल रहा होगा या कहीं बस्तियाँ जली होंगी या कहीं हाथ हथकड़ी में क़ैद या कहीं चूड़ियाँ पड़ी होंगी या कहीं ख़ामुशी की तक़रीबात या कहीं घंटियाँ बजी होंगी लौट आएँगे शहर से भाई हाथ में राखियाँ बँधी होंगी उन दिनों कोई मर गया होगा जिन दिनों शादियाँ हुई होंगी
Tehzeeb Hafi50 Likes







