दुख हमारा कम करेंगे, आप रहने दीजिये आग को शबनम करेंगे, आप रहने दीजिये आप ही के हुक्म से लाशें बिछी हैं हर तरफ़ आप भी मातम करेंगे, आप रहने दीजिये आपने खोया किसे है, आपने देखा है क्या आप किस का ग़म करेंगे, आप रहने दीजिये चाक जितने भी गरीबां हो चुके हैं आज तक हम उन्हें परचम करेंगे, आप रहने दीजिये ज़िन्दगी ने ये सबक़ हम को सिखाया देर से दर्द को मरहम करेंगे, आप रहने दीजिए आप का तो शौक़ है जलते घरों को देखना आप आँखें नम करेंगे, आप रहने दीजिये
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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का
Waseem Barelvi
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अपनी मंज़िल का रास्ता भेजो जान हम को वहाँ बुला भेजो क्या हमारा नहीं रहा सावन ज़ुल्फ़ याँ भी कोई घटा भेजो नई कलियाँ जो अब खिली हैं वहाँ उन की ख़ुश्बू को इक ज़रा भेजो हम न जीते हैं और न मरते हैं दर्द भेजो न तुम दवा भेजो धूल उड़ती है जो उस आँगन में उस को भेजो सबा सबा भेजो ऐ फकीरो गली के उस गुल की तुम हमें अपनी ख़ाक-ए-पा भेजो शफ़क़-ए-शाम-ए-हिज्र के हाथों अपनी उतरी हुई क़बा भेजो कुछ तो रिश्ता है तुम से कम-बख़्तों कुछ नहीं कोई बद-दुआ' भेजो
Jaun Elia
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चारपाई पे आ उतारी है ज़िन्दगी ज़िंदा लाश भारी है आप दुख दे रहे है रो रहा हूँ और ये फ़िलहाल जारी है रोना लिखा गया रोते है जिम्मेदारी तो जिम्मेदारी है मेरी मर्ज़ी जहाँ भी सर्फ़ करूँ ज़िन्दगी मेरी है, तुम्हारी है दुश्मनी के हजारो दर्जे है आख़िरी दर्जा रिशतादारी है
Afkar Alvi
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किस तरह होगा फ़कीरों का गुज़ारा सोचे उस सेे कहना कि वो इक बार दुबारा सोचे कैसे मुमकिन है उसे और कोई काम न हो कैसे मुमकिन है कि वो सिर्फ़ हमारा सोचे तेरे अफ़लाक पे जाए तो सितारा चमके मेरे अफ़लाक पे आए तो सितारा सोचे टूटे पतवार की कश्ती का मुक़द्दर क्या है ये तो दरिया ही बताए या किनारा सोचे ऐसा मौका हो कि बस एक ही बच सकता हो और उस वक़्त भी एक शख़्स तुम्हारा सोचे
Zahid Bashir
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जो इस्म-ओ-जिस्म को बाहम निभाने वाला नहीं मैं ऐसे इश्क़ पर ईमान लाने वाला नहीं मैं पाँव धोके पि यूँ, यार बनके जो आए मुनाफ़िक़ों को तो मैं मुँह लगाने वाला नहीं बस इतना जान ले ऐ पुर-कशिश के दिल तुझ सेे बहल तो सकता है पर तुझ पे आने वाला नहीं तुझे किसी ने ग़लत कह दिया मेरे बारे नहीं मियाँ मैं दिलों को दुखाने वाला नहीं सुन ऐ काबिला-ए-कुफी-दिलाँ मुकर्रर सुन अली कभी भी हजीमत उठाने वाला नहीं
Ali Zaryoun
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