ghazalKuch Alfaaz

अब नए सपने सजाना आप को शादी मुबारक रात दिन बस मुस्कुराना आप को शादी मुबारक याद करवाई थी मैं ने जो ग़ज़ल मेरी कभी वो हो सके तो भूल जाना आप को शादी मुबारक जानता हूँ मन करेगा बात करलें इक दफ़ा बस फ़ोन लेकिन मत लगाना आप को शादी मुबारक दूर अब माँ बाप से घर से हमेशा ही रहोगे वक़्त पर खा लेना खाना आप को शादी मुबारक आपसे ये इल्तिजा, मैं जब कभी टीवी पे आऊँ आप चैनल मत हटाना, आप को शादी मुबारक पूछ ले कोई सहेली क्या हुआ उस इश्क़ का तो दोष मुझ पर ही लगाना आप को शादी मुबारक आपने शादी रचाई तो मेरी उम्मीद टूटी शुक्रिया करता दीवाना आप को शादी मुबारक

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ज़ने हसीन थी और फूल चुन कर लाती थी मैं शे'र कहता था, वो दास्ताँ सुनाती थी अरब लहू था रगों में, बदन सुनहरा था वो मुस्कुराती नहीं थी, दीए जलाती थी "अली से दूर रहो", लोग उस सेे कहते थे "वो मेरा सच है", बहुत चीख कर बताती थी "अली ये लोग तुम्हें जानते नहीं हैं अभी" गले लगाकर मेरा हौसला बढ़ाती थी ये फूल देख रहे हो, ये उस का लहजा था ये झील देख रहे हो, यहाँ वो आती थी मैं उस के बा'द कभी ठीक से नहीं जागा वो मुझ को ख़्वाब नहीं नींद से जगाती थी उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़्यादा उसे रूलाती थी मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी "अली" कि उस को देख कर बस अपनी याद आती थी

Ali Zaryoun

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बग़ैर उस को बताए निभाना पड़ता है ये इश्क़ राज़ है इस को छुपाना पड़ता है मैं अपने ज़ेहन की ज़िदस बहुत परेशाँ हूँ तेरे ख़याल की चौखट पे आना पड़ता है तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है

Mehshar Afridi

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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा यूँँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे या'नी मेरे बा'द भी या'नी साँस लिए जाते होंगे

Jaun Elia

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अब मेरे साथ नहीं है समझे ना समझाने की बात नहीं है समझे ना तुम माँगोगे और तुम्हें मिल जाएगा प्यार है ये ख़ैरात नहीं है समझे ना मैं बादल हूँ जिस पर चाहूँ बरसूँगा मेरी कोई ज़ात नहीं है समझे ना अपना ख़ाली हाथ मुझे मत दिखलाओ इस में मेरा हाथ नहीं है समझे ना

Zubair Ali Tabish

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ग़ज़ल तो सब को मीठी लग रही थी मगर नातिक को मिर्ची लग रही थी तुम्हारे लब नहीं चू में थे जब तक मुझे हर चीज़ कड़वी लग रही थी मैं जिस दिन छोड़ने वाला था उस को वो उस दिन सब सेे प्यारी लग रही थी

Zubair Ali Tabish

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कल उस की आरती मैं ने उतारी मगर मत पूछना कैसे उतारी गले तक आ गई थी बात मेरे सो पानी पी लिया, नीचे उतारी उसे भी मौत ने कुछ दिन पुकारा वो जिस ने लाश पंखे से उतारी

Tanoj Dadhich

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चमचमाती कार में उस की बिदाई हो गई पर यक़ीन आता नहीं है बेवफ़ाई हो गई पार्क में सब दोस्त मेरे राह देखें हैं मेरी अब तो जाने दो मुझे अब तो पढ़ाई हो गई आदमी को और बच्चों को पता चलता नहीं रोटी सब्ज़ी कब बनी और कब सफ़ाई हो गई आओ बैठो अब सुनो तारीफ़ मेरी दोस्तों जिस ने छोड़ा है मुझे उस की बुराई हो गई आख़री चोटी से गिरकर हम मरे हैं इश्क़ की हम समझते थे हिमालय की चढ़ाई हो गई

Tanoj Dadhich

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कल तक जो शख़्स साथ मेरे था चला गया ऐसा लगा कि आँख में तिनका चला गया मिलने वो आए और अकेले ही आए हैं या'नी कि कैच छूट के चौका चला गया मैं बोल जब रहा था नहीं रोक पाए वो सो रात भर मैं शे'र सुनाता चला गया कमज़ोरियाँ बता के उसे सोचता हूँ मैं आटे में पानी हद से ज़ियादा चला गया बे-फ़िक्र था 'तनोज' ख़बर ही नहीं हुई वो पास आया, दिल को निकाला, चला गया

Tanoj Dadhich

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डरता नहीं हूँ मैं किसी भी इम्तिहान से दूँगा सभी जवाब मगर इत्मीनान से लौट आती है सदा यूँँ मेरे जिस्म से मेरी जैसे कि लौट आई हो ख़ाली मकान से उस ने लिया गुलाब मगर कुछ नहीं कहा निकला नहीं है तीर अभी भी कमान से लंकेश को हराया था सीता बचाई थी बनता था घर को लौटना पुष्पक विमान से ख़ुद का ही आसमान है काफ़ी 'तनोज' को जलता नहीं वो और किसी की उड़ान से

Tanoj Dadhich

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तड़पता ही नहीं इतना अगर शाइ'र नहीं होता तड़पना क्या? मैं ख़ुश रहता अगर शाइ'र नहीं होता कभी सुनता नहीं इस को ज़माना ग़ौर से यारों अहम किरदार क़िस्से का अगर शाइ'र नहीं होता मुझे सबकी मोहब्बत ने बनाया एक ऑटोग्राफ़ मैं सिग्नेचर ही रह जाता अगर शाइ'र नहीं होता ख़ुदा की रहमतों से मैं मेरी ग़ज़लों का मालिक हूँ कहीं नौकर बना होता अगर शाइ'र नहीं होता मुझे भी घेर लेती फिर किसी दिन मज़हबी बातें सियासत में चला जाता अगर शाइ'र नहीं होता 'नवा', 'ग़ाफ़िल', 'चराग़', 'आशू', 'वरुन आनन्द' और 'ताबिश' 'तनोज' इनसे नहीं मिलता अगर शाइ'र नहीं होता

Tanoj Dadhich

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