ajiib manzar hai barishon ka makan paani men bah raha hai falak zamin ki hudud men hai nishan paani men bah raha hai tamam faslen ujad chuki hain na hal bacha hai na bail baaqi kisan girvi rakha hua hai lagan paani men bah raha hai azaab utra to paanv sab ke zamin ki sathon se aa lage hain hava ke ghar men nahin hai koi machan paani men bah raha hai koi kisi ko nahin bachata sab apni khatir hi tairte hain ye din qayamat ka din ho jaise jahan paani men bah raha hai udaas ankhon ke badalon ne dilon ke gard-o-ghhubar dhoe yaqin patthar bana khada hai guman paani men bah raha hai ajib manzar hai barishon ka makan pani mein bah raha hai falak zamin ki hudud mein hai nishan pani mein bah raha hai tamam faslen ujad chuki hain na hal bacha hai na bail baqi kisan girwi rakha hua hai lagan pani mein bah raha hai azab utra to panw sab ke zamin ki sathon se aa lage hain hawa ke ghar mein nahin hai koi machan pani mein bah raha hai koi kisi ko nahin bachata sab apni khatir hi tairte hain ye din qayamat ka din ho jaise jahan pani mein bah raha hai udas aankhon ke baadalon ne dilon ke gard-o-ghubar dhoe yaqin patthar bana khada hai guman pani mein bah raha hai
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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अजीब मंज़र है बारिशों का मकान पानी में बह रहा है फ़लक ज़मीं की हुदूद में है निशान पानी में बह रहा है तमाम फ़सलें उजड़ चुकी हैं न हल बचा है न बैल बाक़ी किसान गिरवी रखा हुआ है लगान पानी में बह रहा है अज़ाब उतरा तो पाँव सब के ज़मीं की सतहों से आ लगे हैं हवा के घर में नहीं है कोई मचान पानी में बह रहा है कोई किसी को नहीं बचाता सब अपनी ख़ातिर ही तैरते हैं ये दिन क़यामत का दिन हो जैसे जहान पानी में बह रहा है उदास आँखों के बादलों ने दिलों के गर्द-ओ-ग़ुबार धोए यक़ीन पत्थर बना खड़ा है गुमान पानी में बह रहा
Shakeel Azmi
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अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है ये हम ने इश्क़ किया है या कोई भूल की है ख़याल आया है अब रास्ता बदल लेंगे अभी तलक तो बहुत ज़िंदगी फ़ुज़ूल की है ख़ुदा करे कि ये पौदा ज़मीं का हो जाए कि आरज़ू मिरे आँगन को एक फूल की है न जाने कौन सा लम्हा मिरे क़रार का है न जाने कौन सी साअ'त तिरे हुसूल की है न जाने कौन सा चेहरा मिरी किताब का है न जाने कौन सी सूरत तिरे नुज़ूल की है जिन्हें ख़याल हो आँखों का लौट जाएँ वो अब इस के बा'द हुकूमत सफ़र में धूल की है ये शोहरतें हमें यूँँही नहीं मिली हैं 'शकील' ग़ज़ल ने हम से भी बहुत वसूल की है
Shakeel Azmi
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मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल तू नई सुब्ह के सूरज की है उजली सी किरन मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा 'शकील' टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल
Shakeel Azmi
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मैं भी तुम जैसा हूँ अपने से जुदा मत समझो आदमी ही मुझे रहने दो ख़ुदा मत समझो ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो रास आता नहीं सब को ये मोहब्बत का मरज़ मेरी बीमारी को तुम अपनी दवा मत समझो
Shakeel Azmi
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