अक्स है आईना-ए-दहर में सूरत मेरी कुछ हक़ीक़त नहीं इतनी है हक़ीक़त मेरी देखता मैं उसे क्यूँँकर कि नक़ाब उठते ही बन के दीवार खड़ी हो गई हैरत मेरी रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी सच है एहसान का भी बोझ बहुत होता है चार फूलों से दबी जाती है तुर्बत मेरी आईने से उन्हें कुछ उन्स नहीं बात ये है चाहते हैं कोई देखा करे सूरत मेरी मैं ये समझूँ कोई माशूक़ मिरे हाथ आया मेरे क़ाबू में जो आ जाए तबीअ'त मेरी बू-ए-गेसू ने शगूफ़ा ये नया छोड़ा है निकहत-ए-गुल से उलझती है तबीअ'त मेरी उन से इज़हार-ए-मोहब्बत जो कोई करता है दूर से उस को दिखा देते हैं तुर्बत मेरी जाते जाते वो यही कर गए ताकीद 'जलील' दिल में रखिएगा हिफ़ाज़त से मोहब्बत मेरी
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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बहारें लुटा दीं जवानी लुटा दी तुम्हारे लिए ज़िंदगानी लुटा दी सबा ने तो बरसाए गुल फ़स्ल-ए-गुल में घटा ने मय-ए-अरग़वानी लुटा दी अदाओं पे कर दी फ़िदा सारी हस्ती निगाहों पे दुनिया-ए-फ़ानी लुटा दी अजब दौलत-ए-हुस्न पाई थी दिल ने न मानी मिरी इक न मानी लुटा दी न खोना था ग़फ़लत में अहद-ए-जवानी अजब रात थी ये सुहानी लुटा दी न की हुस्न की क़द्र ऐ माह-ए-कामिल फ़क़त रात भर में जवानी लुटा दी हसीनों ने रंगीनी-ए-ख़्वाब-ए-शीरीं सुनी जब हमारी कहानी लुटा दी अजब हौसला हम ने ग़ुंचा का देखा तबस्सुम पे सारी जवानी लुटा दी 'जलील' आप की शा'इरी पर किसी ने निगाहों की जादू-बयानी लुटा दी
Jaleel Manikpuri
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न ख़ुशी अच्छी है ऐ दिल न मलाल अच्छा है यार जिस हाल में रक्खे वही हाल अच्छा है दिल-ए-बेताब को पहलू में मचलते क्या देर सुन ले इतना किसी काफ़िर का जमाल अच्छा है बात उल्टी वो समझते हैं जो कुछ कहता हूँ अब के पूछा तो ये कह दूँगा कि हाल अच्छा है सोहबत आईने से बचपन में ख़ुदा ख़ैर करे वो अभी से कहीं समझें न जमाल अच्छा है मुश्तरी दिल का ये कह कह के बनाया उन को चीज़ अनोखी है नई जिंस है माल अच्छा है चश्म ओ दिल जिस के हों मुश्ताक़ वो सूरत अच्छी जिस की ता'रीफ़ हो घर घर वो जमाल अच्छा है यार तक रोज़ पहुँचती है बुराई मेरी रश्क होता है कि मुझ से मिरा हाल अच्छा है अपनी आँखें नज़र आती हैं जो अच्छी उन को जानते हैं मिरे बीमार का हाल अच्छा है बातों बातों में लगा लाए हसीनों को 'जलील' तुम को भी सेहर-बयानी में कमाल अच्छा है
Jaleel Manikpuri
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