ghazalKuch Alfaaz

बड़े नादान है नज़रें इधर कर भूल जाते हैं तो हम भी सादा दिल ठहरे सँवर कर भूल जाते हैं अजी हम दीन-ओ-दुनिया, घर, वफ़ा सब से परेशाँ हैं तो किस के नाम से रोए बिफर कर भूल जाते हैं वफ़ा कर के वफ़ा मांगें उसे ये भी सहूलत है हमारा काम है हम काम कर कर भूल जाते हैं ये मत पूछो कि कब सुधरेंगे हम तुम को ख़बर है ना सुधरते हैं मुसलसल हम सुधर कर भूल जाते हैं बड़े मजनू बड़ी लैला उमर को जानते तो है हैं ऐसा भी कि बालों को कलर कर भूल जाते हैं तुम्हारे साथ में जीना हुआ मर मर के गर जीना तो समझो बोझ को सब दर-गुज़र कर भूल जाते हैं कहेंगे सब भला मुझ को अजी है देर मरने की सभी यारो को ज़िंदा है ख़बर कर भूल जाते है सभी जन्नत से आए हैं जहाँ जन्नत बनाने को मगर 'आफ़त' है ये सारे उतर कर भूल जाते हैं

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा मैं जिस कोशिश से उस को भूल जाने में लगा हूँ ज़्यादा भी अगर लग जाए तो हफ़्ता लगेगा

Tehzeeb Hafi

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हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते जान होती तो मिरी जान लुटाते जाते अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत कर के जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते मुझ को रोने का सलीक़ा भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते जाते हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

Rahat Indori

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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा यूँँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे या'नी मेरे बा'द भी या'नी साँस लिए जाते होंगे

Jaun Elia

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क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगा वो हम समझते थे कि हम उस को भुला सकते हैं वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो कितना सोचा था पर इतना तो नहीं सोचा था याद बन जाएगा वो ख़्वाब नज़र आएगा वो सब के होते हुए इक रोज़ वो तन्हा होगा फिर वो ढूँढेगा हमें और नहीं पाएगा वो इत्तिफ़ाक़न जो कभी सामने आया 'अजमल' अब वो तन्हा तो न होगा जो ठहर जाएगा वो

Ajmal Siraj

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ये किस तरह का तअ'ल्लुक़ है आप का मेरे साथ मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ यही कहीं हमें रस्तों ने बद-दुआ दी थी मगर मैं भूल गया और कौन था मेरे साथ वो झाँकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है तुझे यक़ीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ

Tehzeeb Hafi

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जब सही शा'इरी से मिलते हैं एक मंज़र कशी से मिलते हैं अपना पेशा है रोज़ मिलने का रोज़ नेकी बदी से मिलते हैं उस ने ऐसे सलाम भेजे हैं जो हमें अजनबी से मिलते हैं और वो हम सेे ही नहीं मिलते यार वो हर किसी से मिलते हैं अब ख़ुदाओं से तर्क कर के सब आइए आदमी से मिलते हैं हम बड़े लोग हो नहीं सकते हम सभी से सही से मिलते हैं रोज़ दफ्तर भले नहीं जाते पर तुझे हाज़िरी से मिलते हैं जब जहाँ जाए रौशनी कर दे जबकि वो सादगी से मिलते हैं खूब मिलते हैं बंद पलकों से और बेचेहरगी से मिलते हैं आप तन्हाइयों में मिलिएगा आप तिश्ना लबी से मिलते है रंग सारे जो काइ‌नात के है आप की ओढ़नी से मिलते हैं हम उसे भेज भी नहीं पाए आज ख़त डाइरी से मिलते है जब से ये आ गया है क़ातिल पर ले के दिल हम छुरी से मिलते है है वो रूठा तो उस को जाने दे हम सेे मिल हम ख़ुशी से मिलते है

Gagan Bajad 'Aafat'

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खुली आँखों से सपने देखते हैं हक़ीक़त में वहम को घोलते हैं हमारे झूठ की क़ीमत बहुत है न जाने किस लिए सच बोलते हैं मोहब्बत से हमें इनकार कब है मगर वो सैलरी भी पूछते हैं हमारे कल से भी घबरा रहे हैं हमारा रास्ता भी रोकते है किसी मिसरे से हम को छेड़ कर के ग़ज़ल सो जाती है हम जागते हैं शराफ़त उन पे अब भी सज रही है अजी वो खेल अच्छा खेलते हैं तुझे दिन-रात रो कर क्या मिलेगा न पूछो शे'र कैसे सूझते हैं बड़े है ख़ौफ़ में ये मेरे कद से वही काग़ज़ से जो कद नापते हैं तमन्नाओं की कीमत गिर पड़ी है नुमाइश है बदन अब जानते हैं न होना इश्क़ में कितना भला है चलो होने के ख़तरे देखते है भला होना हक़ीक़त में बुरा है फ़क़त इतना बुरा हम मानते हैं किसी के पैर की बेड़ी रहे थे वही अब आगे पीछे डोलते हैं

Gagan Bajad 'Aafat'

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पहले ख़ुद अपनी रफ्तार गिरा कर देखें फिर हम सेे कहना मेआर गिरा कर देखें कांच के जैसे थाम रखा है तुझ को मैं ने जीना लगता है दुश्वार, गिरा कर देखें अपनी मस्जिद तोड़ें अपने मंदिर तोड़ें दुनिया के हक़ में औज़ार गिरा कर देखें तुम नज़रों से गिरना मत उठ ना पाओगे ना माने तो बरखुरदार गिरा कर देखें इन सब को ये क़ैद मुबारक हो दुनिया की इन के जिम्में ये दीवार गिरा कर देखें दीमक का घर कैसे गिरकर बन जाता है तोड़ के देखें या सरकार गिरा कर देखें दुनिया भर को पागल करने वाले है ये दिलवालो के ये सरदार गिरा कर देखें पायल की छन छन सी मीठी बातें 'आफ़त' गर जो सुननी हो झंकार गिरा कर देखें

Gagan Bajad 'Aafat'

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इश्क़ करने का अजी तुम में हुनर है ही नहीं इश्क़ कैसा जो उधर है और इधर है ही नहीं छोड़ कर उन को कहाँ जाएँगे इतनी रात में रह गुज़र हम सेे ख़फ़ा है और घर है ही नहीं क्या करेंगे इश्क़ कर के घर में सौ सौ काम हैं इश्क़ का क़िस्सा कहीं भी मुख़्तसर है ही नहीं नाती पोते हो चुके हैं उन के भी और मेरे भी दिल लगाने की हमारी अब उमर है ही नहीं चाँद तारे सब नज़ारे जिस के आगे कुछ नहीं पर करें क्या हम जिधर हैं वो उधर है ही नहीं रो पड़े थे आप क्यूँँ जब वो किसी के साथ थी रोना ही क्यूँँ जब के दिल में कुछ अगर है ही नहीं इश्क़ का क़िस्सा खुला घर पर सटाके वो पड़े रंग बदले खाल के असली कलर है ही नहीं देने वाले ने दिए है ज़िंदगी के चार दिन इश्क़ जिस में ता-सहर है उम्र भर है ही नहीं आप को ही हो मुबारक आप का ये मशवरा बा-हुनर है बा-असर है कार-गर है ही नहीं जिन का होना या न होना एक जैसी बात है उन की भी है ये शिकायत के कदर है ही नहीं उस ने पूछा मेरी ख़ातिर यार को छोड़ोगे तुम हम सफ़र गर हम नहीं तो रह गुज़र है ही नहीं यार हम सेे जो करा ले उन को हक हम ने दिया यारियाँ वो है जहाँ लेकिन मगर है ही नहीं आप का अहसान ठहरा आप पे भी मुझ पे भी आप मेरे हो चुके मुझ को ख़बर है ही नहीं

Gagan Bajad 'Aafat'

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