ghazalKuch Alfaaz

पहले ख़ुद अपनी रफ्तार गिरा कर देखें फिर हम सेे कहना मेआर गिरा कर देखें कांच के जैसे थाम रखा है तुझ को मैं ने जीना लगता है दुश्वार, गिरा कर देखें अपनी मस्जिद तोड़ें अपने मंदिर तोड़ें दुनिया के हक़ में औज़ार गिरा कर देखें तुम नज़रों से गिरना मत उठ ना पाओगे ना माने तो बरखुरदार गिरा कर देखें इन सब को ये क़ैद मुबारक हो दुनिया की इन के जिम्में ये दीवार गिरा कर देखें दीमक का घर कैसे गिरकर बन जाता है तोड़ के देखें या सरकार गिरा कर देखें दुनिया भर को पागल करने वाले है ये दिलवालो के ये सरदार गिरा कर देखें पायल की छन छन सी मीठी बातें 'आफ़त' गर जो सुननी हो झंकार गिरा कर देखें

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो

Jaun Elia

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तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन' हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा

Hasan Abbasi

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इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ हम तेरे सर की क़सम झूठ ही खाने लग जाएँ इतने सन्नाटे पिए मेरी समा'अत ने कि अब सिर्फ़ आवाज़ पे चाहूँ तो निशाने लग जाएँ चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे जिन की ता'बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ

Mehshar Afridi

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बड़े नादान है नज़रें इधर कर भूल जाते हैं तो हम भी सादा दिल ठहरे सँवर कर भूल जाते हैं अजी हम दीन-ओ-दुनिया, घर, वफ़ा सब से परेशाँ हैं तो किस के नाम से रोए बिफर कर भूल जाते हैं वफ़ा कर के वफ़ा मांगें उसे ये भी सहूलत है हमारा काम है हम काम कर कर भूल जाते हैं ये मत पूछो कि कब सुधरेंगे हम तुम को ख़बर है ना सुधरते हैं मुसलसल हम सुधर कर भूल जाते हैं बड़े मजनू बड़ी लैला उमर को जानते तो है हैं ऐसा भी कि बालों को कलर कर भूल जाते हैं तुम्हारे साथ में जीना हुआ मर मर के गर जीना तो समझो बोझ को सब दर-गुज़र कर भूल जाते हैं कहेंगे सब भला मुझ को अजी है देर मरने की सभी यारो को ज़िंदा है ख़बर कर भूल जाते है सभी जन्नत से आए हैं जहाँ जन्नत बनाने को मगर 'आफ़त' है ये सारे उतर कर भूल जाते हैं

Gagan Bajad 'Aafat'

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जब सही शा'इरी से मिलते हैं एक मंज़र कशी से मिलते हैं अपना पेशा है रोज़ मिलने का रोज़ नेकी बदी से मिलते हैं उस ने ऐसे सलाम भेजे हैं जो हमें अजनबी से मिलते हैं और वो हम सेे ही नहीं मिलते यार वो हर किसी से मिलते हैं अब ख़ुदाओं से तर्क कर के सब आइए आदमी से मिलते हैं हम बड़े लोग हो नहीं सकते हम सभी से सही से मिलते हैं रोज़ दफ्तर भले नहीं जाते पर तुझे हाज़िरी से मिलते हैं जब जहाँ जाए रौशनी कर दे जबकि वो सादगी से मिलते हैं खूब मिलते हैं बंद पलकों से और बेचेहरगी से मिलते हैं आप तन्हाइयों में मिलिएगा आप तिश्ना लबी से मिलते है रंग सारे जो काइ‌नात के है आप की ओढ़नी से मिलते हैं हम उसे भेज भी नहीं पाए आज ख़त डाइरी से मिलते है जब से ये आ गया है क़ातिल पर ले के दिल हम छुरी से मिलते है है वो रूठा तो उस को जाने दे हम सेे मिल हम ख़ुशी से मिलते है

Gagan Bajad 'Aafat'

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इश्क़ करने का अजी तुम में हुनर है ही नहीं इश्क़ कैसा जो उधर है और इधर है ही नहीं छोड़ कर उन को कहाँ जाएँगे इतनी रात में रह गुज़र हम सेे ख़फ़ा है और घर है ही नहीं क्या करेंगे इश्क़ कर के घर में सौ सौ काम हैं इश्क़ का क़िस्सा कहीं भी मुख़्तसर है ही नहीं नाती पोते हो चुके हैं उन के भी और मेरे भी दिल लगाने की हमारी अब उमर है ही नहीं चाँद तारे सब नज़ारे जिस के आगे कुछ नहीं पर करें क्या हम जिधर हैं वो उधर है ही नहीं रो पड़े थे आप क्यूँँ जब वो किसी के साथ थी रोना ही क्यूँँ जब के दिल में कुछ अगर है ही नहीं इश्क़ का क़िस्सा खुला घर पर सटाके वो पड़े रंग बदले खाल के असली कलर है ही नहीं देने वाले ने दिए है ज़िंदगी के चार दिन इश्क़ जिस में ता-सहर है उम्र भर है ही नहीं आप को ही हो मुबारक आप का ये मशवरा बा-हुनर है बा-असर है कार-गर है ही नहीं जिन का होना या न होना एक जैसी बात है उन की भी है ये शिकायत के कदर है ही नहीं उस ने पूछा मेरी ख़ातिर यार को छोड़ोगे तुम हम सफ़र गर हम नहीं तो रह गुज़र है ही नहीं यार हम सेे जो करा ले उन को हक हम ने दिया यारियाँ वो है जहाँ लेकिन मगर है ही नहीं आप का अहसान ठहरा आप पे भी मुझ पे भी आप मेरे हो चुके मुझ को ख़बर है ही नहीं

Gagan Bajad 'Aafat'

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खुली आँखों से सपने देखते हैं हक़ीक़त में वहम को घोलते हैं हमारे झूठ की क़ीमत बहुत है न जाने किस लिए सच बोलते हैं मोहब्बत से हमें इनकार कब है मगर वो सैलरी भी पूछते हैं हमारे कल से भी घबरा रहे हैं हमारा रास्ता भी रोकते है किसी मिसरे से हम को छेड़ कर के ग़ज़ल सो जाती है हम जागते हैं शराफ़त उन पे अब भी सज रही है अजी वो खेल अच्छा खेलते हैं तुझे दिन-रात रो कर क्या मिलेगा न पूछो शे'र कैसे सूझते हैं बड़े है ख़ौफ़ में ये मेरे कद से वही काग़ज़ से जो कद नापते हैं तमन्नाओं की कीमत गिर पड़ी है नुमाइश है बदन अब जानते हैं न होना इश्क़ में कितना भला है चलो होने के ख़तरे देखते है भला होना हक़ीक़त में बुरा है फ़क़त इतना बुरा हम मानते हैं किसी के पैर की बेड़ी रहे थे वही अब आगे पीछे डोलते हैं

Gagan Bajad 'Aafat'

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