इश्क़ करने का अजी तुम में हुनर है ही नहीं इश्क़ कैसा जो उधर है और इधर है ही नहीं छोड़ कर उन को कहाँ जाएँगे इतनी रात में रह गुज़र हम सेे ख़फ़ा है और घर है ही नहीं क्या करेंगे इश्क़ कर के घर में सौ सौ काम हैं इश्क़ का क़िस्सा कहीं भी मुख़्तसर है ही नहीं नाती पोते हो चुके हैं उन के भी और मेरे भी दिल लगाने की हमारी अब उमर है ही नहीं चाँद तारे सब नज़ारे जिस के आगे कुछ नहीं पर करें क्या हम जिधर हैं वो उधर है ही नहीं रो पड़े थे आप क्यूँँ जब वो किसी के साथ थी रोना ही क्यूँँ जब के दिल में कुछ अगर है ही नहीं इश्क़ का क़िस्सा खुला घर पर सटाके वो पड़े रंग बदले खाल के असली कलर है ही नहीं देने वाले ने दिए है ज़िंदगी के चार दिन इश्क़ जिस में ता-सहर है उम्र भर है ही नहीं आप को ही हो मुबारक आप का ये मशवरा बा-हुनर है बा-असर है कार-गर है ही नहीं जिन का होना या न होना एक जैसी बात है उन की भी है ये शिकायत के कदर है ही नहीं उस ने पूछा मेरी ख़ातिर यार को छोड़ोगे तुम हम सफ़र गर हम नहीं तो रह गुज़र है ही नहीं यार हम सेे जो करा ले उन को हक हम ने दिया यारियाँ वो है जहाँ लेकिन मगर है ही नहीं आप का अहसान ठहरा आप पे भी मुझ पे भी आप मेरे हो चुके मुझ को ख़बर है ही नहीं
Related Ghazal
तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
249 likes
बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
196 likes
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे
Rahat Indori
190 likes
More from Gagan Bajad 'Aafat'
बड़े नादान है नज़रें इधर कर भूल जाते हैं तो हम भी सादा दिल ठहरे सँवर कर भूल जाते हैं अजी हम दीन-ओ-दुनिया, घर, वफ़ा सब से परेशाँ हैं तो किस के नाम से रोए बिफर कर भूल जाते हैं वफ़ा कर के वफ़ा मांगें उसे ये भी सहूलत है हमारा काम है हम काम कर कर भूल जाते हैं ये मत पूछो कि कब सुधरेंगे हम तुम को ख़बर है ना सुधरते हैं मुसलसल हम सुधर कर भूल जाते हैं बड़े मजनू बड़ी लैला उमर को जानते तो है हैं ऐसा भी कि बालों को कलर कर भूल जाते हैं तुम्हारे साथ में जीना हुआ मर मर के गर जीना तो समझो बोझ को सब दर-गुज़र कर भूल जाते हैं कहेंगे सब भला मुझ को अजी है देर मरने की सभी यारो को ज़िंदा है ख़बर कर भूल जाते है सभी जन्नत से आए हैं जहाँ जन्नत बनाने को मगर 'आफ़त' है ये सारे उतर कर भूल जाते हैं
Gagan Bajad 'Aafat'
0 likes
खुली आँखों से सपने देखते हैं हक़ीक़त में वहम को घोलते हैं हमारे झूठ की क़ीमत बहुत है न जाने किस लिए सच बोलते हैं मोहब्बत से हमें इनकार कब है मगर वो सैलरी भी पूछते हैं हमारे कल से भी घबरा रहे हैं हमारा रास्ता भी रोकते है किसी मिसरे से हम को छेड़ कर के ग़ज़ल सो जाती है हम जागते हैं शराफ़त उन पे अब भी सज रही है अजी वो खेल अच्छा खेलते हैं तुझे दिन-रात रो कर क्या मिलेगा न पूछो शे'र कैसे सूझते हैं बड़े है ख़ौफ़ में ये मेरे कद से वही काग़ज़ से जो कद नापते हैं तमन्नाओं की कीमत गिर पड़ी है नुमाइश है बदन अब जानते हैं न होना इश्क़ में कितना भला है चलो होने के ख़तरे देखते है भला होना हक़ीक़त में बुरा है फ़क़त इतना बुरा हम मानते हैं किसी के पैर की बेड़ी रहे थे वही अब आगे पीछे डोलते हैं
Gagan Bajad 'Aafat'
4 likes
जब सही शा'इरी से मिलते हैं एक मंज़र कशी से मिलते हैं अपना पेशा है रोज़ मिलने का रोज़ नेकी बदी से मिलते हैं उस ने ऐसे सलाम भेजे हैं जो हमें अजनबी से मिलते हैं और वो हम सेे ही नहीं मिलते यार वो हर किसी से मिलते हैं अब ख़ुदाओं से तर्क कर के सब आइए आदमी से मिलते हैं हम बड़े लोग हो नहीं सकते हम सभी से सही से मिलते हैं रोज़ दफ्तर भले नहीं जाते पर तुझे हाज़िरी से मिलते हैं जब जहाँ जाए रौशनी कर दे जबकि वो सादगी से मिलते हैं खूब मिलते हैं बंद पलकों से और बेचेहरगी से मिलते हैं आप तन्हाइयों में मिलिएगा आप तिश्ना लबी से मिलते है रंग सारे जो काइनात के है आप की ओढ़नी से मिलते हैं हम उसे भेज भी नहीं पाए आज ख़त डाइरी से मिलते है जब से ये आ गया है क़ातिल पर ले के दिल हम छुरी से मिलते है है वो रूठा तो उस को जाने दे हम सेे मिल हम ख़ुशी से मिलते है
Gagan Bajad 'Aafat'
2 likes
पहले ख़ुद अपनी रफ्तार गिरा कर देखें फिर हम सेे कहना मेआर गिरा कर देखें कांच के जैसे थाम रखा है तुझ को मैं ने जीना लगता है दुश्वार, गिरा कर देखें अपनी मस्जिद तोड़ें अपने मंदिर तोड़ें दुनिया के हक़ में औज़ार गिरा कर देखें तुम नज़रों से गिरना मत उठ ना पाओगे ना माने तो बरखुरदार गिरा कर देखें इन सब को ये क़ैद मुबारक हो दुनिया की इन के जिम्में ये दीवार गिरा कर देखें दीमक का घर कैसे गिरकर बन जाता है तोड़ के देखें या सरकार गिरा कर देखें दुनिया भर को पागल करने वाले है ये दिलवालो के ये सरदार गिरा कर देखें पायल की छन छन सी मीठी बातें 'आफ़त' गर जो सुननी हो झंकार गिरा कर देखें
Gagan Bajad 'Aafat'
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Gagan Bajad 'Aafat'.
Similar Moods
More moods that pair well with Gagan Bajad 'Aafat''s ghazal.







