ghazalKuch Alfaaz

जब सही शा'इरी से मिलते हैं एक मंज़र कशी से मिलते हैं अपना पेशा है रोज़ मिलने का रोज़ नेकी बदी से मिलते हैं उस ने ऐसे सलाम भेजे हैं जो हमें अजनबी से मिलते हैं और वो हम सेे ही नहीं मिलते यार वो हर किसी से मिलते हैं अब ख़ुदाओं से तर्क कर के सब आइए आदमी से मिलते हैं हम बड़े लोग हो नहीं सकते हम सभी से सही से मिलते हैं रोज़ दफ्तर भले नहीं जाते पर तुझे हाज़िरी से मिलते हैं जब जहाँ जाए रौशनी कर दे जबकि वो सादगी से मिलते हैं खूब मिलते हैं बंद पलकों से और बेचेहरगी से मिलते हैं आप तन्हाइयों में मिलिएगा आप तिश्ना लबी से मिलते है रंग सारे जो काइ‌नात के है आप की ओढ़नी से मिलते हैं हम उसे भेज भी नहीं पाए आज ख़त डाइरी से मिलते है जब से ये आ गया है क़ातिल पर ले के दिल हम छुरी से मिलते है है वो रूठा तो उस को जाने दे हम सेे मिल हम ख़ुशी से मिलते है

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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दिल को तेरी ख़्वाहिश पहली बार हुई इस सहरा में बारिश पहली बार हुई माँगने वाले हीरे मोती माँगते हैं अश्कों की फ़रमाइश पहली बार हुई डूबने वाले इक इक कर के आ जाएँ दरिया में गुंजाइश पहली बार हुई

Abrar Kashif

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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ

Ali Zaryoun

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अपनी आँखों में भर कर ले जाने हैं मुझ को उस के आँसू काम में लाने है देखो हम कोई वहशी नइँ दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नइँ लगवाने हैं हम तुम इक दूजे की सीढ़ी है जानाँ बाक़ी दुनिया तो साँपों के ख़ाने हैं पाक़ीज़ा चीज़ों को पाक़ीज़ा लिखो मत लिक्खो उस की आँखें मय-ख़ाने हैं

Varun Anand

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बड़े नादान है नज़रें इधर कर भूल जाते हैं तो हम भी सादा दिल ठहरे सँवर कर भूल जाते हैं अजी हम दीन-ओ-दुनिया, घर, वफ़ा सब से परेशाँ हैं तो किस के नाम से रोए बिफर कर भूल जाते हैं वफ़ा कर के वफ़ा मांगें उसे ये भी सहूलत है हमारा काम है हम काम कर कर भूल जाते हैं ये मत पूछो कि कब सुधरेंगे हम तुम को ख़बर है ना सुधरते हैं मुसलसल हम सुधर कर भूल जाते हैं बड़े मजनू बड़ी लैला उमर को जानते तो है हैं ऐसा भी कि बालों को कलर कर भूल जाते हैं तुम्हारे साथ में जीना हुआ मर मर के गर जीना तो समझो बोझ को सब दर-गुज़र कर भूल जाते हैं कहेंगे सब भला मुझ को अजी है देर मरने की सभी यारो को ज़िंदा है ख़बर कर भूल जाते है सभी जन्नत से आए हैं जहाँ जन्नत बनाने को मगर 'आफ़त' है ये सारे उतर कर भूल जाते हैं

Gagan Bajad 'Aafat'

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खुली आँखों से सपने देखते हैं हक़ीक़त में वहम को घोलते हैं हमारे झूठ की क़ीमत बहुत है न जाने किस लिए सच बोलते हैं मोहब्बत से हमें इनकार कब है मगर वो सैलरी भी पूछते हैं हमारे कल से भी घबरा रहे हैं हमारा रास्ता भी रोकते है किसी मिसरे से हम को छेड़ कर के ग़ज़ल सो जाती है हम जागते हैं शराफ़त उन पे अब भी सज रही है अजी वो खेल अच्छा खेलते हैं तुझे दिन-रात रो कर क्या मिलेगा न पूछो शे'र कैसे सूझते हैं बड़े है ख़ौफ़ में ये मेरे कद से वही काग़ज़ से जो कद नापते हैं तमन्नाओं की कीमत गिर पड़ी है नुमाइश है बदन अब जानते हैं न होना इश्क़ में कितना भला है चलो होने के ख़तरे देखते है भला होना हक़ीक़त में बुरा है फ़क़त इतना बुरा हम मानते हैं किसी के पैर की बेड़ी रहे थे वही अब आगे पीछे डोलते हैं

Gagan Bajad 'Aafat'

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पहले ख़ुद अपनी रफ्तार गिरा कर देखें फिर हम सेे कहना मेआर गिरा कर देखें कांच के जैसे थाम रखा है तुझ को मैं ने जीना लगता है दुश्वार, गिरा कर देखें अपनी मस्जिद तोड़ें अपने मंदिर तोड़ें दुनिया के हक़ में औज़ार गिरा कर देखें तुम नज़रों से गिरना मत उठ ना पाओगे ना माने तो बरखुरदार गिरा कर देखें इन सब को ये क़ैद मुबारक हो दुनिया की इन के जिम्में ये दीवार गिरा कर देखें दीमक का घर कैसे गिरकर बन जाता है तोड़ के देखें या सरकार गिरा कर देखें दुनिया भर को पागल करने वाले है ये दिलवालो के ये सरदार गिरा कर देखें पायल की छन छन सी मीठी बातें 'आफ़त' गर जो सुननी हो झंकार गिरा कर देखें

Gagan Bajad 'Aafat'

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इश्क़ करने का अजी तुम में हुनर है ही नहीं इश्क़ कैसा जो उधर है और इधर है ही नहीं छोड़ कर उन को कहाँ जाएँगे इतनी रात में रह गुज़र हम सेे ख़फ़ा है और घर है ही नहीं क्या करेंगे इश्क़ कर के घर में सौ सौ काम हैं इश्क़ का क़िस्सा कहीं भी मुख़्तसर है ही नहीं नाती पोते हो चुके हैं उन के भी और मेरे भी दिल लगाने की हमारी अब उमर है ही नहीं चाँद तारे सब नज़ारे जिस के आगे कुछ नहीं पर करें क्या हम जिधर हैं वो उधर है ही नहीं रो पड़े थे आप क्यूँँ जब वो किसी के साथ थी रोना ही क्यूँँ जब के दिल में कुछ अगर है ही नहीं इश्क़ का क़िस्सा खुला घर पर सटाके वो पड़े रंग बदले खाल के असली कलर है ही नहीं देने वाले ने दिए है ज़िंदगी के चार दिन इश्क़ जिस में ता-सहर है उम्र भर है ही नहीं आप को ही हो मुबारक आप का ये मशवरा बा-हुनर है बा-असर है कार-गर है ही नहीं जिन का होना या न होना एक जैसी बात है उन की भी है ये शिकायत के कदर है ही नहीं उस ने पूछा मेरी ख़ातिर यार को छोड़ोगे तुम हम सफ़र गर हम नहीं तो रह गुज़र है ही नहीं यार हम सेे जो करा ले उन को हक हम ने दिया यारियाँ वो है जहाँ लेकिन मगर है ही नहीं आप का अहसान ठहरा आप पे भी मुझ पे भी आप मेरे हो चुके मुझ को ख़बर है ही नहीं

Gagan Bajad 'Aafat'

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