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बे-सबब हम से जुदाई न करो मुझ से आशिक़ से बुराई न करो ख़ाकसाराँ को न करिए पामाल जग में फ़िरऔं सी ख़ुदाई न करो बे-गुनाहाँ कूँ न कर डालो क़त्ल आह कूँ तीर-ए-हवाई न करो एक दिल तुम से नहीं है राज़ी जग में हर इक सूँ बुराई न करो महव है 'फ़ाएज़'-ए-शैदा तुम पर उस से हर लहजा बखाई न करो

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा चारा-गर की नज़र बताती है हाल अच्छा नहीं है आज मिरा मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़ क़ैस करता है काम-काज मिरा कोई कासा मदद को भेज अल्लाह मेरे बस में नहीं है ताज मिरा मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा

Fahmi Badayuni

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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा तू तो बीनाई है मेरी तेरे अलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं मैं ने तुझ को अगर तेरे घर पे उतारा तो मैं कैसे घर जाऊँगा चाहता हूँ तुम्हें और बहुत चाहता हूँ, तुम्हें ख़ुद भी मालूम है हाँ अगर मुझ सेे पूछा किसी ने तो मैं सीधा मुँह पर मुकर जाऊँगा तेरे दिल से तेरे शहर से तेरे घर से तेरी आँख से तेरे दर से तेरी गलियों से तेरे वतन से निकाला हुआ हूँ किधर जाऊँगा

Tehzeeb Hafi

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यार मेरा मियान-ए-गुलशन है ग़र्क़-ए-ख़ूँ फूल ता-ब-दामन है दिल लुभाता है सब का वो साजन दिल-फ़रेबी में उस को क्या फ़न है तारे जिऊँ दर है जिस के हल्क़ा-ब-गोश वो बिना गोश सुब्ह-ए-रौशन है उस नज़ारे से सब शहीद हुए वो नयन क्या बला-ए-रह-ज़न है क्या बयाँ कर सकूँ मैं गत उस की 'फ़ाएज़' अत ख़ुश-अदा सिरीजन है

Faez Dehlvi

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मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया इस घर मने वो दिल-बर-ए-उस्ताद न आया गुलशन मिरी अँखियाँ में लगे गुलख़न-ए-दोज़ख़ जो सैर को मुझ साथ परी-ज़ाद न आया साँझ आई दियो दिन बी हुआ फ़िक्र में आख़िर वो दिल-बर-ए-जादूगर-ओ-सय्याद न आया आया न हमन पास किया वा'दा-ख़िलाफ़ी 'फ़ाएज़' का कुछ अहवाल मगर याद न आया

Faez Dehlvi

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गुफ़्तम कि मुख तिरा क्या गुफ़्ता सूरज सूँ बेहतर गुफ़्तम कि कान का दर गुफ़्ता कि बह ज़ अख़्तर गुफ़्तम दहान-ओ-रूयत गुफ़्ता कि ग़ुंचा-ओ-गुल गुफ़्तम कपोल का ख़ाल गुफ़्ता कि क़ुर्स-ए-अम्बर गुफ़्तम कि चश्म-ए-जादू गुफ़्ता कि दोनों ख़ंजर गुफ़्तम धड़ी लबाँ की गुफ़्त अज़ अक़ीक़ बेहतर गुफ़्तम कपोल तेरे गुफ़्ता कि बर्ग-ए-लाला गुफ़्तम कि बोसा तुझ लब गुफ़्ता कि बह ज़ शक्कर गुफ़्तम कि भौंहा तेरी गुफ़्ता हिलाल दोनों गुफ़्तम कि ज़ुल्फ़ तेरी गुफ़्ता कि सुंबुल-ए-तर गुफ़्तम गदा हूँ तेरा गुफ़्ता सही मुनासिब गुफ़्तम असीर तुझ कूँ गुफ़्ता तमाम किश्वर गुफ़्तम कि क़द तुम्हारा गुफ़्ता कि सर्व-ए-तन्नाज़ गुफ़्तम कि दिल तिरा क्या गुफ़्ता कि सख़्त पत्थर गुफ़्तम अदा-ओ-ग़म्ज़ा गुफ़्ता बला-ए-जाँ-हा गुफ़्तम इताब-ओ-क़हरत गुफ़्ता कि हौल-ए-महशर गुफ़्तम कि 'फ़ाएज़' आया गुफ़्ता कि ख़ैर-मक़्दम गुफ़्तम कुजास्त जा-अश गुफ़्ता कि बर-सर-ए-दर

Faez Dehlvi

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मिरा महबूब सब का मन हरन है नज़र कर देख वो आहू नैन है नहीं अब जग में वैसा और साजन मुझे सूरत-शनासी बीच फ़न है सबी दीवाने हैं उस मह-लक़ा के मगर वो दिल-रुबा जादू नयन है करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़' मिरा साजन बहार-ए-अंजुमन है

Faez Dehlvi

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मेरी जाँ वो बादा-ख़्वारी याद है वक़्त-ए-मस्ती गिर्या-ज़ारी याद है मोतिया का हार ओ चम्पा की छड़ी जोड़ा-ए-दामन-किनारी याद है सब अभूकन तेरे तन पर ख़ुशनुमा ख़ूबी-ए-अंगिया ओ सारी याद है अब्र का साया ओ सब्ज़ा राह का जान-ए-मन रथ की सवारी याद है कोयलां के नाले अमराई के बीच उस समय की बे-क़रारी याद है मेंह बी तो टपकता था बूँद बूँद 'फ़ाएज़' उस दिन की सवारी याद है

Faez Dehlvi

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