ghazalKuch Alfaaz

मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया इस घर मने वो दिल-बर-ए-उस्ताद न आया गुलशन मिरी अँखियाँ में लगे गुलख़न-ए-दोज़ख़ जो सैर को मुझ साथ परी-ज़ाद न आया साँझ आई दियो दिन बी हुआ फ़िक्र में आख़िर वो दिल-बर-ए-जादूगर-ओ-सय्याद न आया आया न हमन पास किया वा'दा-ख़िलाफ़ी 'फ़ाएज़' का कुछ अहवाल मगर याद न आया

Related Ghazal

वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

244 likes

कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

435 likes

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

130 likes

ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

292 likes

कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उस ने हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे

Vikram Gaur Vairagi

70 likes

More from Faez Dehlvi

मिरा महबूब सब का मन हरन है नज़र कर देख वो आहू नैन है नहीं अब जग में वैसा और साजन मुझे सूरत-शनासी बीच फ़न है सबी दीवाने हैं उस मह-लक़ा के मगर वो दिल-रुबा जादू नयन है करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़' मिरा साजन बहार-ए-अंजुमन है

Faez Dehlvi

0 likes

यार मेरा मियान-ए-गुलशन है ग़र्क़-ए-ख़ूँ फूल ता-ब-दामन है दिल लुभाता है सब का वो साजन दिल-फ़रेबी में उस को क्या फ़न है तारे जिऊँ दर है जिस के हल्क़ा-ब-गोश वो बिना गोश सुब्ह-ए-रौशन है उस नज़ारे से सब शहीद हुए वो नयन क्या बला-ए-रह-ज़न है क्या बयाँ कर सकूँ मैं गत उस की 'फ़ाएज़' अत ख़ुश-अदा सिरीजन है

Faez Dehlvi

0 likes

गुफ़्तम कि मुख तिरा क्या गुफ़्ता सूरज सूँ बेहतर गुफ़्तम कि कान का दर गुफ़्ता कि बह ज़ अख़्तर गुफ़्तम दहान-ओ-रूयत गुफ़्ता कि ग़ुंचा-ओ-गुल गुफ़्तम कपोल का ख़ाल गुफ़्ता कि क़ुर्स-ए-अम्बर गुफ़्तम कि चश्म-ए-जादू गुफ़्ता कि दोनों ख़ंजर गुफ़्तम धड़ी लबाँ की गुफ़्त अज़ अक़ीक़ बेहतर गुफ़्तम कपोल तेरे गुफ़्ता कि बर्ग-ए-लाला गुफ़्तम कि बोसा तुझ लब गुफ़्ता कि बह ज़ शक्कर गुफ़्तम कि भौंहा तेरी गुफ़्ता हिलाल दोनों गुफ़्तम कि ज़ुल्फ़ तेरी गुफ़्ता कि सुंबुल-ए-तर गुफ़्तम गदा हूँ तेरा गुफ़्ता सही मुनासिब गुफ़्तम असीर तुझ कूँ गुफ़्ता तमाम किश्वर गुफ़्तम कि क़द तुम्हारा गुफ़्ता कि सर्व-ए-तन्नाज़ गुफ़्तम कि दिल तिरा क्या गुफ़्ता कि सख़्त पत्थर गुफ़्तम अदा-ओ-ग़म्ज़ा गुफ़्ता बला-ए-जाँ-हा गुफ़्तम इताब-ओ-क़हरत गुफ़्ता कि हौल-ए-महशर गुफ़्तम कि 'फ़ाएज़' आया गुफ़्ता कि ख़ैर-मक़्दम गुफ़्तम कुजास्त जा-अश गुफ़्ता कि बर-सर-ए-दर

Faez Dehlvi

0 likes

मेरी जाँ वो बादा-ख़्वारी याद है वक़्त-ए-मस्ती गिर्या-ज़ारी याद है मोतिया का हार ओ चम्पा की छड़ी जोड़ा-ए-दामन-किनारी याद है सब अभूकन तेरे तन पर ख़ुशनुमा ख़ूबी-ए-अंगिया ओ सारी याद है अब्र का साया ओ सब्ज़ा राह का जान-ए-मन रथ की सवारी याद है कोयलां के नाले अमराई के बीच उस समय की बे-क़रारी याद है मेंह बी तो टपकता था बूँद बूँद 'फ़ाएज़' उस दिन की सवारी याद है

Faez Dehlvi

0 likes

बे-सबब हम से जुदाई न करो मुझ से आशिक़ से बुराई न करो ख़ाकसाराँ को न करिए पामाल जग में फ़िरऔं सी ख़ुदाई न करो बे-गुनाहाँ कूँ न कर डालो क़त्ल आह कूँ तीर-ए-हवाई न करो एक दिल तुम से नहीं है राज़ी जग में हर इक सूँ बुराई न करो महव है 'फ़ाएज़'-ए-शैदा तुम पर उस से हर लहजा बखाई न करो

Faez Dehlvi

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Faez Dehlvi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Faez Dehlvi's ghazal.