ghazalKuch Alfaaz

चेहरे चाँद सितारों वाले हेरा-फेरी करते हैं ये पैकर मटियारों वाले हेरा-फेरी करते हैं इन में घू में राशी अफ़सर या स्मगलर पाउडर के अक्सर लंबी कारों वाले हेरा-फेरी करते हैं ख़बरों में स्कैंडल हैं तस्वीरों में उर्यानी है यारो कुछ अख़बारों वाले हेरा-फेरी करते हैं इन पर फूल निछावर करने वाली जनता क्या जाने अक्सर लीडर हारों वाले हेरा-फेरी करते हैं 'शाहिद'-साहिब कहलाते हैं मिस्टर भी मौलाना भी हज़रत दो किरदारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

Related Ghazal

चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

406 likes

कर रहे हैं सब अदब सब ठीक है और वो भी बे-सबब सब ठीक है पूछना था वाक़ई सब ठीक था कह रहे थे आप जब सब ठीक है सोचो दरिया हाल पूछे एक दिन और कह दें तश्ना-लब सब ठीक है ओढ़ ली है चेहरे पे झूठी हँसी अब बना तस्वीर अब सब ठीक है

Ahmad Abdullah

25 likes

जो भी इज़्ज़त के डर से डर जाए मत करे इश्क़ अपने घर जाए बात आ जाए जब दु'आओं पर इस सेे बेहतर है बंदा मर जाए थोड़ी सी और देर सामने रह मेरी आँखों का पेट भर जाए अल-मुहैमिन के घर भी ख़तरे हैं जाए भी तो कोई किधर जाए हाँ अक़ीदा अगर न क़ैद रखे फिर तो इंसान कुछ भी कर जाए बेबसी की ये आख़िरी हद है मेरी औलाद आप पर जाए उस के चेहरे पर आज उदासी थी हाए 'अफ़्कार अल्वी' मर जाए

Afkar Alvi

38 likes

इक परी सी प्यारी लड़की सोने की नर्म हाथों में , अँगूठी सोने की उस का चेहरा, जैसे चाँदी का है, और उस की आँखें, जैसे लगती सोने की आई लव यूँ, बोल मुझ को, फिर तू देख हाथ पहना दूँगा, चूड़ी सोने की हम फ़क़ीरों में गिने जाते है, और उस के कंगन , उस की चूड़ी सोने की नींद आती ही नहीं थी तब मुझे जब ज़रूरत थी मुझे भी सोने की उस की क़ीमत कितनी है ? मत पूछ दोस्त उस के आगे दुनिया फीकी सोने की श्याम तो, मीरा न हो पाया तेरा क्या करेगी अब ये मूर्ति सोने की वो तेरी हो ही नहीं सकती ' सलीम ' माटी का तू और वो पूरी सोने की

BR SUDHAKAR

25 likes

पानी की चोट चोट है कच्चे घड़ों से पूछ कम उम्र में बियाही गई लड़कियों से पूछ किस किस से तेरे बारे में पूछा नहीं बता जा डाकियों से पूछ जा कंडक्टरों से पूछ ये हिज्र कैसे काटता है आदमी की उम्र नदियों से कटने वाले बड़े पर्वतों से पूछ कैसे जुदा किया है उसे कैसे ख़ुश रहें बरसे बग़ैर जाते हुए बादलों से पूछ

Rishabh Sharma

21 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Sarfaraz Shahid.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Sarfaraz Shahid's ghazal.