dhadkanen mohabbat ki dil-nashin khamoshi marhaba ai hangamo afrin khamoshi kaj-bayan thikanon se duur ik kharabe men ghar bana ke rahti hai ik zahin khamoshi shaam hai ye vaade ki ishq ke irade ki ik javan sa sannata ik hasin khamoshi samne jo aa jaun kaifiyat haya ki phir taank degi palkon par naznin khamoshi tuut kar jo bikhrunga dekh legi duniya phir ik makan mohabbat ka aur makin khamoshi guftugu to tujh se thi ru-ba-ru main khud se tha ik falak sa hangama ik zamin khamoshi bevafa khayalon se zakhm ke havalon se kya saval karti phir vo hasin khamoshi dhadkanen mohabbat ki dil-nashin khamoshi marhaba ai hangamo aafrin khamoshi kaj-bayan thikanon se dur ek kharabe mein ghar bana ke rahti hai ek zahin khamoshi sham hai ye wade ki ishq ke irade ki ek jawan sa sannata ek hasin khamoshi samne jo aa jaun kaifiyat haya ki phir tank degi palkon par naznin khamoshi tut kar jo bikhrunga dekh legi duniya phir ek makan mohabbat ka aur makin khamoshi guftugu to tujh se thi ru-ba-ru main khud se tha ek falak sa hangama ek zamin khamoshi bewafa khayalon se zakhm ke hawalon se kya sawal karti phir wo hasin khamoshi
Related Ghazal
ज़ने हसीन थी और फूल चुन कर लाती थी मैं शे'र कहता था, वो दास्ताँ सुनाती थी अरब लहू था रगों में, बदन सुनहरा था वो मुस्कुराती नहीं थी, दीए जलाती थी "अली से दूर रहो", लोग उस सेे कहते थे "वो मेरा सच है", बहुत चीख कर बताती थी "अली ये लोग तुम्हें जानते नहीं हैं अभी" गले लगाकर मेरा हौसला बढ़ाती थी ये फूल देख रहे हो, ये उस का लहजा था ये झील देख रहे हो, यहाँ वो आती थी मैं उस के बा'द कभी ठीक से नहीं जागा वो मुझ को ख़्वाब नहीं नींद से जगाती थी उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़्यादा उसे रूलाती थी मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी "अली" कि उस को देख कर बस अपनी याद आती थी
Ali Zaryoun
102 likes
किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
Anwar Shaoor
95 likes
इस से पहले कि तुझे और सहारा न मिले मैं तिरे साथ हूँ जब तक मिरे जैसा न मिले कम से कम बदले में जन्नत उसे दे दी जाए जिस मोहब्बत के गिरफ्तार को सेहरा ना मिले लोग कहते है के हम लोग बुरे आदमी है लोग भी ऐसे जिन्होने हमें देखा ना मिले बस यही कह के उसे मैं ने ख़ुदा को सौंपा इत्तिफ़ाक़न कही मिल जाए तो रोता ना मिले बद-दुआ है के वहाँ आए जहाँ बैठते थे और ‘अफ्कार’ वहाँ आप को बैठा ना मिले
Afkar Alvi
38 likes
दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे मैं ढूँढ़ रहा हूँ मिरी वो शम्अ' कहाँ है जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे आख़िर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिल की का'बा नहीं बनता है तो बुत-ख़ाना बना दे 'बहज़ाद' हर इक गाम पे इक सज्दा-ए-मस्ती हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानाना बना दे
Behzad Lakhnavi
32 likes
रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैं सब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं मैं कहाँ जाऊँ करूँँ किस से शिकायत उस की हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं ज़ख़्म भरने लगे हैं पिछली मुलाक़ातों के फिर मुलाक़ात के आसार नज़र आते हैं एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश' और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
39 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nazir Wahid.
Similar Moods
More moods that pair well with Nazir Wahid's ghazal.







