gaahe gaahe bas ab yahi ho kya tum se mil kar bahut khushi ho kya mil rahi ho bade tapak ke saath mujh ko yaksar bhula chuki ho kya yaad hain ab bhi apne khvab tumhen mujh se mil kar udaas bhi ho kya bas mujhe yunhi ik khayal aaya sochti ho to sochti ho kya ab miri koi zindagi hi nahin ab bhi tum meri zindagi ho kya kya kaha ishq javedani hai! akhiri baar mil rahi ho kya haan faza yaan ki soi soi si hai to bahut tez raushni ho kya mere sab tanz be-asar hi rahe tum bahut duur ja chuki ho kya dil men ab soz-e-intizar nahin sham-e-ummid bujh gai ho kya is samundar pe tishna-kam huun main baan tum ab bhi bah rahi ho kya gahe gahe bas ab yahi ho kya tum se mil kar bahut khushi ho kya mil rahi ho bade tapak ke sath mujh ko yaksar bhula chuki ho kya yaad hain ab bhi apne khwab tumhein mujh se mil kar udas bhi ho kya bas mujhe yunhi ek khayal aaya sochti ho to sochti ho kya ab meri koi zindagi hi nahin ab bhi tum meri zindagi ho kya kya kaha ishq jawedani hai! aakhiri bar mil rahi ho kya han faza yan ki soi soi si hai to bahut tez raushni ho kya mere sab tanz be-asar hi rahe tum bahut dur ja chuki ho kya dil mein ab soz-e-intizar nahin sham-e-ummid bujh gai ho kya is samundar pe tishna-kaam hun main ban tum ab bhi bah rahi ho kya
Related Ghazal
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
371 likes
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
355 likes
मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
456 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Jaun Eliya.
Similar Moods
More moods that pair well with Jaun Eliya's ghazal.







