इसीलिए तो यहाँ रतजगा ज़ियादा है कि मेरे ख़्वाब में वो जागता ज़ियादा है मुझे तो दूर से आदत है उस को तकने की सो उस का एक नज़र देखना ज़ियादा है उसे तमीज़ भी तो होनी चाहिए थी फिर अगर वो आप से लिखा पढ़ा ज़ियादा है मैं हर किसी पे बहुत ऐतिबार करती हूँ ख़ुशी की बात है पर सानेहा ज़ियादा है
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन' हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा
Hasan Abbasi
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क्यूँ तेरे दर से ही चुप चाप गुज़र आते हैं जो ख़ुदाओं की तरह बन के शरर आते हैं वो मेरा हो के भी हो सकता नहीं हैरत है फिर भी हर हाल में हम साथ नज़र आते हैं वक़्त है दोस्त इसे ध्यान में रख काम में ला ख़्वाब वीरान जज़ीरों पे उतर आते हैं उस के वहदत ने मुझे अपनी तरफ़ खींचा था वरना रस्ते में तो कितने ही शजर आते हैं हर कोई चाँद सा चेहरा नहीं होता सच्चा आबशारों की तहों में भी खंडर आते हैं मैं कि हैरान हूँ इस रब्त पे हम दोनों के ले के हर बार अदू तेरी ख़बर आते हैं
Tajdeed Qaiser
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कैसे मुमकिन था तुझे दिल से भुलाए जाते हक़ यही था कि तेरे नाज़ उठाए जाते ज़िन्दगी रास्ता देती नहीं आसानी से हम-सफ़र यूँँ ही नहीं दोस्त बनाए जाते तेरी ख़ातिर तो हम अपनों से भी लड़ बैठे थे ख़्वाब दीवार से कैसे न लगाए जाते देखते हम भी कि किस किस की तलब है दुनिया जितने क़ैदी थे सभी सामने लाए जाते आज़माना ही तुझे होता अगर मेरी जान रास्ता दे के मसाइल न बताए जाते पहले हम रूह की दीवार गिराते और फिर राह में तेरी कई जाल बिछाए जाते फ़ासला रखते मगर इतना कि साँस आती रहे तेरी क़ुर्बत में कई फूल खिलाए जाते
Tajdeed Qaiser
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सुकून तुम से मेरा इत्मीनान तुम से है हसीन शख़्स मेरा कुल जहान तुम से है तुम्हारा लम्स मुझे बेशुमार करता है मेरी निग़ाह है तुम से उड़ान तुम से है मैं राज़-ए-इश्क़ बयाँ कर नहीं सकी अब तक यही ख़बर है ज़मान-ओ-मकान तुम से है कहीं मैं होश जो खो दूँ तो सामने आना बिखर के देखा है मेरा धियान तुम से है जो तुम नहीं तो करें किस पे बात हम 'तजदीद' कि अपनी ख़ामुशी अपना बयान तुम से है
Tajdeed Qaiser
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हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले
Tajdeed Qaiser
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उस को ज़िदस तो अच्छा नहीं रोकना छोड़ दो उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो तुम मिलोगे नहीं तो मैं जीते जी मर जाऊँगी बा-ख़ुदा ऐसी ख़ुशफ़हमियाँ पालना छोड़ दो मेरी आँखों पे पट्टी बँधी है बँधी रहने दो उस के बारे में तुम भी बुरा सोचना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
Tajdeed Qaiser
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