ghazalKuch Alfaaz

क्यूँ तेरे दर से ही चुप चाप गुज़र आते हैं जो ख़ुदाओं की तरह बन के शरर आते हैं वो मेरा हो के भी हो सकता नहीं हैरत है फिर भी हर हाल में हम साथ नज़र आते हैं वक़्त है दोस्त इसे ध्यान में रख काम में ला ख़्वाब वीरान जज़ीरों पे उतर आते हैं उस के वहदत ने मुझे अपनी तरफ़ खींचा था वरना रस्ते में तो कितने ही शजर आते हैं हर कोई चाँद सा चेहरा नहीं होता सच्चा आबशारों की तहों में भी खंडर आते हैं मैं कि हैरान हूँ इस रब्त पे हम दोनों के ले के हर बार अदू तेरी ख़बर आते हैं

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था जब मेरे साथ था वो क्यूँँ न कहा तब कुछ भी वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी

Umair Najmi

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बग़ैर उस को बताए निभाना पड़ता है ये इश्क़ राज़ है इस को छुपाना पड़ता है मैं अपने ज़ेहन की ज़िदस बहुत परेशाँ हूँ तेरे ख़याल की चौखट पे आना पड़ता है तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है

Mehshar Afridi

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सुकून तुम से मेरा इत्मीनान तुम से है हसीन शख़्स मेरा कुल जहान तुम से है तुम्हारा लम्स मुझे बेशुमार करता है मेरी निग़ाह है तुम से उड़ान तुम से है मैं राज़-ए-इश्क़ बयाँ कर नहीं सकी अब तक यही ख़बर है ज़मान-ओ-मकान तुम से है कहीं मैं होश जो खो दूँ तो सामने आना बिखर के देखा है मेरा धियान तुम से है जो तुम नहीं तो करें किस पे बात हम 'तजदीद' कि अपनी ख़ामुशी अपना बयान तुम से है

Tajdeed Qaiser

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इसीलिए तो यहाँ रतजगा ज़ियादा है कि मेरे ख़्वाब में वो जागता ज़ियादा है मुझे तो दूर से आदत है उस को तकने की सो उस का एक नज़र देखना ज़ियादा है उसे तमीज़ भी तो होनी चाहिए थी फिर अगर वो आप से लिखा पढ़ा ज़ियादा है मैं हर किसी पे बहुत ऐतिबार करती हूँ ख़ुशी की बात है पर सानेहा ज़ियादा है

Tajdeed Qaiser

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उस को ज़िदस तो अच्छा नहीं रोकना छोड़ दो उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो तुम मिलोगे नहीं तो मैं जीते जी मर जाऊँगी बा-ख़ुदा ऐसी ख़ुशफ़हमियाँ पालना छोड़ दो मेरी आँखों पे पट्टी बँधी है बँधी रहने दो उस के बारे में तुम भी बुरा सोचना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो

Tajdeed Qaiser

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कैसे मुमकिन था तुझे दिल से भुलाए जाते हक़ यही था कि तेरे नाज़ उठाए जाते ज़िन्दगी रास्ता देती नहीं आसानी से हम-सफ़र यूँँ ही नहीं दोस्त बनाए जाते तेरी ख़ातिर तो हम अपनों से भी लड़ बैठे थे ख़्वाब दीवार से कैसे न लगाए जाते देखते हम भी कि किस किस की तलब है दुनिया जितने क़ैदी थे सभी सामने लाए जाते आज़माना ही तुझे होता अगर मेरी जान रास्ता दे के मसाइल न बताए जाते पहले हम रूह की दीवार गिराते और फिर राह में तेरी कई जाल बिछाए जाते फ़ासला रखते मगर इतना कि साँस आती रहे तेरी क़ुर्बत में कई फूल खिलाए जाते

Tajdeed Qaiser

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हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले

Tajdeed Qaiser

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