ghazalKuch Alfaaz

हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई क्यूँँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई साबित हुआ सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ कहीं नहीं रिश्तों में ढूँढ़ता है तो ढूँडा करे कोई तर्क-ए-तअल्लुक़ात कोई मसअला नहीं ये तो वो रास्ता है कि बस चल पड़े कोई दीवार जानता था जिसे मैं वो धूल थी अब मुझ को ए'तिमाद की दावत न दे कोई मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई ऐ शख़्स अब तो मुझ को सभी कुछ क़ुबूल है ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ आख़िर मेरे मिज़ाज में क्यूँँ दख़्ल दे कोई इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई

Jaun Elia

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नया इक रिश्ता पैदा क्यूँँ करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँँ करें हम ख़मोशी से अदा हो रस्म-ए-दूरी कोई हंगामा बरपा क्यूँँ करें हम ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं वफ़ा-दारी का दावा क्यूँँ करें हम वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँँ करें हम हमारी ही तमन्ना क्यूँँ करो तुम तुम्हारी ही तमन्ना क्यूँँ करें हम किया था अहद जब लम्हों में हम ने तो सारी उम्र ईफ़ा क्यूँँ करें हम नहीं दुनिया को जब पर्वा हमारी तो फिर दुनिया की पर्वा क्यूँँ करें हम ये बस्ती है मुसलामानों की बस्ती यहाँ कार-ए-मसीहा क्यूँँ करें हम

Jaun Elia

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तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ ये मौसम भी बदल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ मुझे ग़म है कि मैं ने ज़िंदगी में कुछ नहीं पाया ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ ये दुनिया-भर के झगड़े घर के क़िस्से काम की बातें बला हर एक टल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ नहीं मिलते हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे ज़माना मुझ से जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

Javed Akhtar

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सुकून तुम से मेरा इत्मीनान तुम से है हसीन शख़्स मेरा कुल जहान तुम से है तुम्हारा लम्स मुझे बेशुमार करता है मेरी निग़ाह है तुम से उड़ान तुम से है मैं राज़-ए-इश्क़ बयाँ कर नहीं सकी अब तक यही ख़बर है ज़मान-ओ-मकान तुम से है कहीं मैं होश जो खो दूँ तो सामने आना बिखर के देखा है मेरा धियान तुम से है जो तुम नहीं तो करें किस पे बात हम 'तजदीद' कि अपनी ख़ामुशी अपना बयान तुम से है

Tajdeed Qaiser

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क्यूँ तेरे दर से ही चुप चाप गुज़र आते हैं जो ख़ुदाओं की तरह बन के शरर आते हैं वो मेरा हो के भी हो सकता नहीं हैरत है फिर भी हर हाल में हम साथ नज़र आते हैं वक़्त है दोस्त इसे ध्यान में रख काम में ला ख़्वाब वीरान जज़ीरों पे उतर आते हैं उस के वहदत ने मुझे अपनी तरफ़ खींचा था वरना रस्ते में तो कितने ही शजर आते हैं हर कोई चाँद सा चेहरा नहीं होता सच्चा आबशारों की तहों में भी खंडर आते हैं मैं कि हैरान हूँ इस रब्त पे हम दोनों के ले के हर बार अदू तेरी ख़बर आते हैं

Tajdeed Qaiser

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कैसे मुमकिन था तुझे दिल से भुलाए जाते हक़ यही था कि तेरे नाज़ उठाए जाते ज़िन्दगी रास्ता देती नहीं आसानी से हम-सफ़र यूँँ ही नहीं दोस्त बनाए जाते तेरी ख़ातिर तो हम अपनों से भी लड़ बैठे थे ख़्वाब दीवार से कैसे न लगाए जाते देखते हम भी कि किस किस की तलब है दुनिया जितने क़ैदी थे सभी सामने लाए जाते आज़माना ही तुझे होता अगर मेरी जान रास्ता दे के मसाइल न बताए जाते पहले हम रूह की दीवार गिराते और फिर राह में तेरी कई जाल बिछाए जाते फ़ासला रखते मगर इतना कि साँस आती रहे तेरी क़ुर्बत में कई फूल खिलाए जाते

Tajdeed Qaiser

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इसीलिए तो यहाँ रतजगा ज़ियादा है कि मेरे ख़्वाब में वो जागता ज़ियादा है मुझे तो दूर से आदत है उस को तकने की सो उस का एक नज़र देखना ज़ियादा है उसे तमीज़ भी तो होनी चाहिए थी फिर अगर वो आप से लिखा पढ़ा ज़ियादा है मैं हर किसी पे बहुत ऐतिबार करती हूँ ख़ुशी की बात है पर सानेहा ज़ियादा है

Tajdeed Qaiser

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उस को ज़िदस तो अच्छा नहीं रोकना छोड़ दो उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो तुम मिलोगे नहीं तो मैं जीते जी मर जाऊँगी बा-ख़ुदा ऐसी ख़ुशफ़हमियाँ पालना छोड़ दो मेरी आँखों पे पट्टी बँधी है बँधी रहने दो उस के बारे में तुम भी बुरा सोचना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो

Tajdeed Qaiser

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