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jaate jaate ye nishani de gaya vo miri ankhon men paani de gaya jagte lamhon ki chadar odh kar koi khvabon ko javani de gaya mere hathon se khilaune chhin kar mujh ko zakhmon ki kahani de gaya hal na tha mushkil ka koi us ke paas sirf vaade asmani de gaya khud se sharminda mujhe hona pada aaina jab mera saani de gaya mujh ko 'azar' ik fareb-e-arzu khub-surat zindagani de gaya jate jate ye nishani de gaya wo meri aankhon mein pani de gaya jagte lamhon ki chadar odh kar koi khwabon ko jawani de gaya mere hathon se khilaune chhin kar mujh ko zakhmon ki kahani de gaya hal na tha mushkil ka koi us ke pas sirf wade aasmani de gaya khud se sharminda mujhe hona pada aaina jab mera sani de gaya mujh ko 'azar' ek fareb-e-arzu khub-surat zindagani de gaya

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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आज मैं ने उसे नज़दीक से जा देखा है वो दरीचा तो मिरे क़द से बहुत ऊँचा है अपने कमरे को अँधेरों से भरा पाया है तेरे बारे में कभी ग़ौर से जब सोचा है हर तमन्ना को रिवायत की तरह तोड़ा है तब कहीं जा के ज़माना मुझे रास आया है तुम को शिकवा है मिरे अहद-ए-मोहब्बत से मगर तुम ने पानी पे कोई लफ़्ज़ कभी लिक्खा है ऐसा बिछड़ा कि मिला ही नहीं फिर उस का पता हाए वो शख़्स जो अक्सर मुझे याद आता है कोई उस शख़्स को अपना नहीं कहता 'आज़र' अपने घर में भी वो ग़ैरों की तरह रहता है

Kafeel Aazar Amrohvi

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उस की आँखों में उतर जाने को जी चाहता है शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है किसी कम-ज़र्फ़ को बा-ज़र्फ़ अगर कहना पड़े ऐसे जीने से तो मर जाने को जी चाहता है एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन अपने वा'दों से मुकर जाने को जी चाहता है क़र्ज़ टूटे हुए ख़्वाबों का अदा हो जाए ज़ात में अपनी बिखर जाने को जी चाहता है अपनी पलकों पे सजाए हुए यादों के दिए उस की नींदों से गुज़र जाने को जी चाहता है एक उजड़े हुए वीरान खंडर में 'आज़र' ना-मुनासिब है मगर जाने को जी चाहता है

Kafeel Aazar Amrohvi

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