ghazalKuch Alfaaz

जब वो बोले कि कोई प्यारा था उन का मेरी तरफ़ इशारा था हम निकल आए जिस्म से बाहर उस ने कुछ इस तरह पुकारा था फेर देता था वो नज़र अपनी हर नज़र का यही उतारा था डूब जाना ही ठीक था मेरा मेरे दोनों तरफ़ किनारा था आख़िरश बोझ हो गया देखो मुझ को जो जिस्म जाँ से प्यारा था

Vishal Bagh19 Likes

Related Ghazal

यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

526 likes

चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

406 likes

मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

456 likes

क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

371 likes

तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो

Jaun Elia

315 likes

More from Vishal Bagh

ख़बर सुन कर वो ये इतरा रहा है मुझे उस का बिछोड़ा खा रहा है मेरे सय्याद को कोई बुला दो मेरे पिंजरे को तोड़ा जा रहा है निकलना है हमें कब से सफ़र पर मगर ये जिस्म आड़े आ रहा है मैं उस को याद भी करना न चाहूँ वो आ कर ख़्वाब में उकसा रहा है चलो उस को अज़ीयत से निकालें सुना है अब भी वो पछता रहा है

Vishal Bagh

10 likes

सुनने में आया है मेरा चर्चा नइँ था मुझ को जितना लगता था मैं उतना नइँ था उस को अच्छे लगते थे सब छैल छबीले हम जैसों को उस सेे कोई ख़तरा नइँ था सादा दिल थे सो हम अपने ही दुश्मन थे वो भी अच्छा लगता था जो अच्छा नइँ था शर्मीले साजन की सब बेशर्मी देखी सब कुछ सोचा करता था वो कहता नइँ था अच्छी सूरत कितनी अच्छी हो सकती थी लेकिन तब तक मैं ने उस को देखा नइँ था

Vishal Bagh

12 likes

जी हमी हैं मुहब्बत के मारे हुए दिल के टूटे हुए जाँ से हारे हुए जिन से बरसों की पहचान थी छुट गई अजनबी आज से हम तुम्हारे हुए इस ज़मीं को भी हम रास आए नहीं हम वही हैं फ़लक से उतारे हुए एक दिन आई दुनिया लिए अपने ग़म हम भी बैठे थे दामन पसारे हुए दिल जो टूटे नहीं ख़ाक में मिल गए दिल जो टूटे फ़लक के सितारे हुए दोष सारा हमारे जुनूँ को न दो उन की जानिब से भी कुछ इशारे हुए इक नज़र के तक़ाज़े पे सब ने कहा हम तुम्हारे हुए हम तुम्हारे हुए

Vishal Bagh

18 likes

वो जो लिखा है सब किताबों में वो ही शामिल नहीं निसाबों में उस की तासीर ऐसे काटी है हम ने घोला उसे शराबों में ये मेरी हिचकियाँ बताती हैं मैं बक़ाया हूँ कुछ हिसाबों में तो कोई तजरबा ही कर लें क्या कुछ नहीं मिल रहा किताबों में हम उसे यूँ ही मिल गए होते उस ने ढूँढ़ा नहीं ख़राबों में आओ और आ के फिर बिछड़ जाओ कुछ इज़ाफ़ा करो 'अज़ाबों में

Vishal Bagh

11 likes

अपनी मर्ज़ी से कुछ चुनूँगा मैं हर अदा पर नहीं मरूँगा मैं वो अगर ऐसे देख ले मुझ को उस को अच्छा नहीं लगूँगा मैं बाग़ में दिल नहीं लगा अब के अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं उस सेे आगे नहीं निकलना पर उस के पीछे नहीं चलूँगा मैं कह गए थे वो याद रक्खेंगे याद ही तो नहीं रहूँगा मैं

Vishal Bagh

16 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Vishal Bagh.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Vishal Bagh's ghazal.