ghazalKuch Alfaaz
झूठ से, सच से, जिस सेे भी यारी रखें आप तो अपनी तक़रीर जारी रखें बात मन की कहें या वतन की कहें झूठ बोलें तो आवाज़ भारी रखें इन दिनों आप मालिक हैं बाजार के जो भी चाहें वो कीमत हमारी रखें आप के पास चोरों की फ़ेहरिस्त है सब पे दस्त-ए-कर्म बारी बारी रखें सैर के वास्ते और भी मुल्क हैं रोज़ तैयार अपनी सवारी रखें वो मुकम्मल भी हो ये ज़रूरी नहीं योजनाएँ मगर ढ़ेर सारी रखें
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