ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का इक मुअ'म्मा है समझने का न समझाने का ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का हुस्न है ज़ात मिरी इश्क़ सिफ़त है मेरी हूँ तो मैं शम्अ' मगर भेस है परवाने का का'बे को दिल की ज़ियारत के लिए जाता हूँ आस्ताना है हरम मेरे सनम-ख़ाने का मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म ये है कि दिल रखता हूँ राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़्साने का ज़िंदगी भी तो पशेमाँ है यहाँ ला के मुझे ढूँडती है कोई हीला मिरे मर जाने का तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग आओ देखो न तमाशा मिरे ग़म-ख़ाने का अब इसे दार पे ले जा के सुला दे साक़ी यूँँ बहकना नहीं अच्छा तिरे मस्ताने का दिल से पहुँची तो हैं आँखों में लहू की बूँदें सिलसिला शीशे से मिलता तो है पैमाने का हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में लिए जाते हैं जनाज़ा तिरे दीवाने का वहदत-ए-हुस्न के जल्वों की ये कसरत ऐ इश्क़ दिल के हर ज़र्रे में आलम है परी-ख़ाने का चश्म-ए-साक़ी असर-ए-मय से नहीं है गुल-रंग दिल मिरे ख़ून से लबरेज़ है पैमाने का लौह दिल को ग़म-ए-उल्फ़त को क़लम कहते हैं कुन है अंदाज़-ए-रक़म हुस्न के अफ़्साने का हम ने छानी हैं बहुत दैर-ओ-हरम की गलियाँ कहीं पाया न ठिकाना तिरे दीवाने का किस की आँखें दम-ए-आख़िर मुझे याद आई हैं दिल मुरक़्क़ा' है छलकते हुए पैमाने का कहते हैं क्या ही मज़े का है फ़साना 'फ़ानी' आप की जान से दूर आप के मर जाने का हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी' ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का
Related Ghazal
सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई क्यूँँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई साबित हुआ सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ कहीं नहीं रिश्तों में ढूँढ़ता है तो ढूँडा करे कोई तर्क-ए-तअल्लुक़ात कोई मसअला नहीं ये तो वो रास्ता है कि बस चल पड़े कोई दीवार जानता था जिसे मैं वो धूल थी अब मुझ को ए'तिमाद की दावत न दे कोई मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई ऐ शख़्स अब तो मुझ को सभी कुछ क़ुबूल है ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ आख़िर मेरे मिज़ाज में क्यूँँ दख़्ल दे कोई इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई
Jaun Elia
77 likes
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
406 likes
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
355 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
मेरे लिए तो इश्क़ का वा'दा है शा'इरी आधा सुरूर तुम हो तो आधा है शा'इरी रुद्राक्ष हाथ में है तो सीने में ओम है कृष्णा है मेरा दिल मेरी राधा है शा'इरी अपना तो मेल जोल ही बस आशिकों से है दरवेश का बस एक लबादा है शा'इरी हो आश्ना कोई तो दिखाती है अपना रंग बे रम्ज़ियों के वास्ते सादा है शा'इरी तुम सामने हो और मेरी दस्तरस में हो इस वक़्त मेरे दिल का इरादा है शा'इरी भगवान हो ख़ुदा हो मुहब्बत हो या बदन जिस सम्त भी चलो यही जादा है शा'इरी इस लिए भी इश्क़ ही लिखता हूँ मैं अली मेरा किसी से आख़री वा'दा है शा'इरी
Ali Zaryoun
70 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Fani Badayuni.
Similar Moods
More moods that pair well with Fani Badayuni's ghazal.







