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kitne aish se rahte honge kitne itrate honge jaane kaise log vo honge jo us ko bhate honge shaam hue khush-bash yahan ke mere paas aa jaate hain mere bujhne ka nazzara karne aa jaate honge vo jo na aane vaala hai na us se mujh ko matlab tha aane valon se kya matlab aate hain aate honge us ki yaad ki bad-e-saba men aur to kya hota hoga yunhi mere baal hain bikhre aur bikhar jaate honge yaaro kuchh to zikr karo tum us ki qayamat banhon ka vo jo simatte honge un men vo to mar jaate honge mera saans ukhadte hi sab bain karenge roenge yaani mere baad bhi yaani saans liye jaate honge kitne aish se rahte honge kitne itraate honge jaane kaise log wo honge jo us ko bhate honge sham hue khush-bash yahan ke mere pas aa jate hain mere bujhne ka nazzara karne aa jate honge wo jo na aane wala hai na us se mujh ko matlab tha aane walon se kya matlab aate hain aate honge us ki yaad ki baad-e-saba mein aur to kya hota hoga yunhi mere baal hain bikhre aur bikhar jate honge yaro kuchh to zikr karo tum us ki qayamat banhon ka wo jo simatte honge un mein wo to mar jate honge mera sans ukhadte hi sab bain karenge roenge yani mere baad bhi yani sans liye jate honge

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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ये अलग बात मुक़द्दर नहीं बदला अपना एक ही दर पे रहे दर नहीं बदला अपना इश्क़ का खेल है शतरंज नहीं है साहिब मात खाई है मगर घर नहीं बदला अपना जाने किस वक़्त अचानक उसे याद आ जाए मैं ने ये सोच के नंबर नहीं बदला अपना

Aadil Rasheed

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अश्क ज़ाया' हो रहे थे, देख कर रोता न था जिस जगह बनता था रोना, मैं वहाँ रोता न था सिर्फ़ तेरी चुप ने मेरे गाल गीले कर दिए मैं तो वो हूँ, जो किसी की मौत पर रोता न था मुझ पर कितने एहसान है गुज़रे, पर उन आँखों को क्या मेरा दुख ये है, के मेरा हम सेफ़र रोता न था मैं ने उस के वस्ल में भी हिज्र कटा है कहीं, वो मेरे कंधे पे रख लेता था सर, रोता न था प्यार तो पहले भी उस सेे था, मगर इतना नहीं तब में उस को छू तो लेता था, मगर रोता न था गिरियो ज़ारी को भी एक ख़ास मौसम चाहिए, मेरी आँखें देख लो, मैं वक़्त पर रोता न था

Tehzeeb Hafi

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ये किस तरह का तअ'ल्लुक़ है आप का मेरे साथ मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ यही कहीं हमें रस्तों ने बद-दुआ दी थी मगर मैं भूल गया और कौन था मेरे साथ वो झाँकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है तुझे यक़ीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ

Tehzeeb Hafi

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