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miri dastaras men hai gar qalam mujhe husn-e-fikr-o-khayal de mujhe shahryar-e-sukhan bana aur enan-e-shahr-e-kamal de miri shakh-e-sher rahe hari de mire sukhan ko sanobari miri jhiil men bhi kanval khila miri guddiyon ko bhi laal de tiri bakhshishon men hai sarvari mire ishq ko de qalandari jo uthe to dast-e-dua lage mujhe aisa dast-e-saval de rag-e-jan men jamne laga lahu use mushk banne ki aarzu hai udaas dasht-e-tatar-e-dil use phir shalang-e-ghhazal de koi baat aqrab-o-shams ki koi zikr-e-zohra-o-mushtari tu bada sitara-shanas hai mujhe koi achchhi si faal de hain ye jism-o-jan ki quyud kya khad-o-khal ke ye hudud kya main huun aks-e-manzar-e-mavara mujhe ainon se nikal de main vahi huun 'tishna'-e-ba-vafa mira aaj bhi vahi muddaa na firaq de mujhe mustaqil na mujhe hamesha visal de meri dastaras mein hai gar qalam mujhe husn-e-fikr-o-khayal de mujhe shahryar-e-sukhan bana aur enan-e-shahr-e-kamal de meri shakh-e-sher rahe hari de mere sukhan ko sanobari meri jhil mein bhi kanwal khila meri guddiyon ko bhi lal de teri bakhshishon mein hai sarwari mere ishq ko de qalandari jo uthe to dast-e-dua lage mujhe aisa dast-e-sawal de rag-e-jaan mein jamne laga lahu use mushk banne ki aarzu hai udas dasht-e-tatar-e-dil use phir shalang-e-ghazal de koi baat aqrab-o-shams ki koi zikr-e-zohra-o-mushtari tu bada sitara-shanas hai mujhe koi achchhi si fal de hain ye jism-o-jaan ki quyud kya khad-o-khal ke ye hudud kya main hun aks-e-manzar-e-mawara mujhe aainon se nikal de main wahi hun 'tishna'-e-ba-wafa mera aaj bhi wahi muddaa na firaq de mujhe mustaqil na mujhe hamesha visal de

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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