सभी कहते बहुत अच्छा अगर तुम शा'इरी करती ज़माना क्या ख़ुदा सुनता अगर तुम शा'इरी करती तुम्हारी बात करने की अदा ने ही किया पागल न जाने हाल क्या होता अगर तुम शा'इरी करती मुनव्वर और राहत फिर तुम्हें भी तो पसंद आते सुनाती जौन का मतला अगर तुम शा'इरी करती नियम कानून भी तुम को बहुत सी छूट देते फिर नहीं लगता कोई नुक़्ता अगर तुम शा'इरी करती
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो
Jaun Elia
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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समझती है ग़ज़ल दुनिया कि दिल नादान है यारों इसे भी आदमी की अब ज़रा पहचान है यारों विरोधी टीम में था तो उसे बाहर बिठाते थे हमारी टीम में आ कर बना कप्तान है यारों तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई मिलेंगे फूल सब इस में ग़ज़ल गुलदान है यारों ख़ुदा की बात है तो फिर मेरा कहना है बस इतना किताबी ज्ञान से बेहतर ज़रा सा ध्यान है यारों पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के दो बच्चे हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों
Tanoj Dadhich
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कल उस की आरती मैं ने उतारी मगर मत पूछना कैसे उतारी गले तक आ गई थी बात मेरे सो पानी पी लिया, नीचे उतारी उसे भी मौत ने कुछ दिन पुकारा वो जिस ने लाश पंखे से उतारी
Tanoj Dadhich
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तड़पता ही नहीं इतना अगर शाइ'र नहीं होता तड़पना क्या? मैं ख़ुश रहता अगर शाइ'र नहीं होता कभी सुनता नहीं इस को ज़माना ग़ौर से यारों अहम किरदार क़िस्से का अगर शाइ'र नहीं होता मुझे सबकी मोहब्बत ने बनाया एक ऑटोग्राफ़ मैं सिग्नेचर ही रह जाता अगर शाइ'र नहीं होता ख़ुदा की रहमतों से मैं मेरी ग़ज़लों का मालिक हूँ कहीं नौकर बना होता अगर शाइ'र नहीं होता मुझे भी घेर लेती फिर किसी दिन मज़हबी बातें सियासत में चला जाता अगर शाइ'र नहीं होता 'नवा', 'ग़ाफ़िल', 'चराग़', 'आशू', 'वरुन आनन्द' और 'ताबिश' 'तनोज' इनसे नहीं मिलता अगर शाइ'र नहीं होता
Tanoj Dadhich
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चमचमाती कार में उस की बिदाई हो गई पर यक़ीन आता नहीं है बेवफ़ाई हो गई पार्क में सब दोस्त मेरे राह देखें हैं मेरी अब तो जाने दो मुझे अब तो पढ़ाई हो गई आदमी को और बच्चों को पता चलता नहीं रोटी सब्ज़ी कब बनी और कब सफ़ाई हो गई आओ बैठो अब सुनो तारीफ़ मेरी दोस्तों जिस ने छोड़ा है मुझे उस की बुराई हो गई आख़री चोटी से गिरकर हम मरे हैं इश्क़ की हम समझते थे हिमालय की चढ़ाई हो गई
Tanoj Dadhich
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कल तक जो शख़्स साथ मेरे था चला गया ऐसा लगा कि आँख में तिनका चला गया मिलने वो आए और अकेले ही आए हैं या'नी कि कैच छूट के चौका चला गया मैं बोल जब रहा था नहीं रोक पाए वो सो रात भर मैं शे'र सुनाता चला गया कमज़ोरियाँ बता के उसे सोचता हूँ मैं आटे में पानी हद से ज़ियादा चला गया बे-फ़िक्र था 'तनोज' ख़बर ही नहीं हुई वो पास आया, दिल को निकाला, चला गया
Tanoj Dadhich
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