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तेरी गली में तो जाने का हौसला ही नहीं करूँँ मैं ज़ख़्म हरे फिर से सोचता ही नहीं अजीब राह है जिस पर हमें है जाना मगर कोई क़रीबी हमें आ के रोकता ही नहीं कि तेरे बा'द तो हम साथ साथ सब के गए वो और बात है ये दिल मिरा गया ही नहीं वो शख़्स जो सदा आँखों में है समाया हुआ मिला तो कह दिया मैं तुम को जानता ही नहीं ज़रा सा और दो ये दर्द कम पड़ा है मुझे कि साँस चल रही है अब भी मैं मरा ही नहीं रुके हुए थे इशारे पे एक जिस के वो फिर ये कह के चल दिया मुझ सेे मैं तेरा था ही नहीं बताया हिज्र के बारे में चारा-गर ने मुझे ये मर्ज़ ऐसा है जिस की कोई दवा ही नहीं

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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यूँँ दिल से मेरे उतर गए तुम नहीं पता फिर किधर गए तुम न ढूँढों ख़ुद को यूँँ मेरे भीतर यक़ीन मानो कि मर गए तुम तुम्हारा क्या है पुराना छोड़ा नए शजर पर ठहर गए तुम तुम्हारे जैसा मिले तुम्हें और ख़बर हो मुझ को बिखर गए तुम वही हुनर अब सिखाओ मुझ को वो जैसे मुँह पर मुकर गए तुम मैं कितना झूठा था कहता था जो कि मर मिटूँगा अगर गए तुम दिलाओ जितना मगर कभी भी यक़ीं न होगा सुधर गए तुम अदा करो शुक्रिया मेरा अब थी मेरी सोहबत सँवर गए तुम

Aqib khan

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मन भर गया है मुझ सेे तो दिलबर बदल कर देख लो क्या एक ही दर पर रहोगे दर बदल कर देख लो इस में तो कोई शक नहीं हैं ख़ूब-सूरत आप पर मेरी तवज्जोह चाहिए तेवर बदल कर देख लो माँ बाप पर जो बोझ है आसान लगता है तुम्हें तुम उन की ज़िम्मेदारियाँ पल भर बदल कर देख लो इन चिंदियों के आने से कुछ भी न बिगड़ा है मेरा इक और मौका है कि तुम लश्कर बदल कर देख लो ये नौकरी आकिब तुम्हारे बस की बिल्कुल भी नहीं ये इश्क़ छोड़ो यार तुम दफ़्तर बदल कर देख लो

Aqib khan

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क्यूँ मुझे कुछ भी यहाँ अच्छा नहीं लगता है अब सच कहूँँ तो ये जहाँ अच्छा नहीं लगता है अब उम्र भर हम साथ हैं ये तो न बोलो मुझ सेे तुम झूठा वा'दा जान ए जाँ अच्छा नहीं लगता है अब हो अगर कुछ काम तो फिर बात भी कर लेंगे हम इश्क़ का चर्चा मियाँ अच्छा नहीं लगता है अब कुछ ख़बर अब तक नहीं है जाना है हम को कहाँ चलना ऐसे राएगाँ अच्छा नहीं लगता है अब चाँद तारों के बराबर बोला था इक शख़्स को सो चमकता आसमाँ अच्छा नहीं लगता है अब वक़्त की ही बात है जो मेरे पीछे थे कभी उन को मेरा कारवाँ अच्छा नहीं लगता है अब

Aqib khan

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