वो कुछ गहरी सोच में ऐसे डूब गया है बैठे बैठे नदी किनारे डूब गया है आज की रात न जाने कितनी लंबी होगी आज का सूरज शाम से पहले डूब गया है वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था पानी पानी कहते कहते डूब गया है मेरे अपने अंदर एक भँवर था जिस में मेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है शोर तो यूँँ उट्ठा था जैसे इक तूफ़ाँ हो सन्नाटे में जाने कैसे डूब गया है आख़िरी ख़्वाहिश पूरी कर के जीना कैसा 'आनस' भी साहिल तक आ के डूब गया है
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे
Rahat Indori
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?
Zubair Ali Tabish
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वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी अजीब शख़्स है अपना भी है पराया भी ये इंतिज़ार सहर का था या तुम्हारा था दिया जलाया भी मैं ने दिया बुझाया भी मैं चाहता हूँ ठहर जाए चश्म-ए-दरिया में लरज़ता अक्स तुम्हारा भी मेरा साया भी बहुत महीन था पर्दा लरज़ती आँखों का मुझे दिखाया भी तू ने मुझे छुपाया भी बयाज़ भर भी गई और फिर भी सादा है तुम्हारे नाम को लिक्खा भी और मिटाया भी
Aanis Moin
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बाहर भी अब अंदर जैसा सन्नाटा है दरिया के उस पार भी गहरा सन्नाटा है शोर थमें तो शायद सदियाँ बीत चुकी हैं अब तक लेकिन सहमा सहमा सन्नाटा है किस से बोलूँ ये तो इक सहरा है जहाँ पर मैं हूँ या फिर गूँगा बहरा सन्नाटा है जैसे इक तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी आज मिरी बस्ती में ऐसा सन्नाटा है नई सहर की चाप न जाने कब उभरेगी चारों जानिब रात का गहरा सन्नाटा है सोच रहे हो सोचो लेकिन बोल न पड़ना देख रहे हो शहर में कितना सन्नाटा है महव-ए-ख़्वाब हैं सारी देखने वाली आँखें जागने वाला बस इक अंधा सन्नाटा है डरना है तो अन-जानी आवाज़ से डरना ये तो 'आनिस' देखा-भाला सन्नाटा है
Aanis Moin
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