ये सुन कर हर कोई हैरान है अब तू मेरी जाँ, किसी की जान है अब मिला कर ख़ाक में अरमाँ हमारे वो पूछे है कोई अरमान है अब तिरे कांधे की पहले शाल थी जो हमारे घर का दस्तर-ख़्वान है अब सभी से सरसरी रिश्ता ही रक्खो मुहब्बत में बड़ा नुक़सान है अब नहीं पहचानता अब कोई मुझ को यही मेरी नई पहचान है अब वो झूटा था मिरा महबूब पहले जो इक आला सियासत-दान है अब उसे कुन कहने की लत पड़ गई है उसे लगता है वो भगवान है अब चलो जाओ हमारा हाथ छोड़ो तुम्हारा रास्ता आसान है अब
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा चारा-गर की नज़र बताती है हाल अच्छा नहीं है आज मिरा मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़ क़ैस करता है काम-काज मिरा कोई कासा मदद को भेज अल्लाह मेरे बस में नहीं है ताज मिरा मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा
Fahmi Badayuni
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अपनी आँखों में भर कर ले जाने हैं मुझ को उस के आँसू काम में लाने है देखो हम कोई वहशी नइँ दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नइँ लगवाने हैं हम तुम इक दूजे की सीढ़ी है जानाँ बाक़ी दुनिया तो साँपों के ख़ाने हैं पाक़ीज़ा चीज़ों को पाक़ीज़ा लिखो मत लिक्खो उस की आँखें मय-ख़ाने हैं
Varun Anand
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
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अब मेरे साथ नहीं है समझे ना समझाने की बात नहीं है समझे ना तुम माँगोगे और तुम्हें मिल जाएगा प्यार है ये ख़ैरात नहीं है समझे ना मैं बादल हूँ जिस पर चाहूँ बरसूँगा मेरी कोई ज़ात नहीं है समझे ना अपना ख़ाली हाथ मुझे मत दिखलाओ इस में मेरा हाथ नहीं है समझे ना
Zubair Ali Tabish
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कहीं न ऐसा हो अपना वक़ार खा जाए ख़िज़ाँ से फूल बचाएँ बहार खा जाए हमारे जैसा कहाँ दिल किसी का होगा भला जो दर्द पाले रखे और क़रार खा जाए पलट के संग तिरी और फेंक सकता हूँ कि मैं वो क़ैस नहीं हाँ जो मार खा जाए उसी का दाख़िला इस दश्त में करो अब से जो सब्र पी सके अपना ग़ुबार खा जाए बहुत क़रार है थोड़ी सी बे-क़रारी दे कहीं न ऐसा हो मुझ को क़रार खा जाए अजब सफ़ीना है ये वक़्त का सफ़ीना भी जो अपनी गोद में बैठा सवार खा जाए
Varun Anand
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मरहम के नहीं हैं ये तरफ़-दार नमक के निकले हैं मिरे ज़ख़्म तलबगार नमक के आया कोई सैलाब कहानी में अचानक और घुल गए पानी में वो किरदार नमक के दोनों ही किनारों पे थी बीमारों की मज्लिस इस पार थे मीठे के तो उस पार नमक के उस ने ही दिए ज़ख़्म ये गर्दन पे हमारी फिर उस ने ही पहनाए हमें हार नमक के कहती थी ग़ज़ल मुझ को है मरहम की ज़रूरत और देते रहे सब उसे अश'आर नमक के जिस सम्त मिला करती थीं ज़ख़्मों की दवाएँ सुनते हैं कि अब हैं वहाँ बाज़ार नमक के
Varun Anand
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काश कि मैं भी होता पत्थर गर था उन को प्यारा पत्थर लोगों की तो बात करें क्या तेरा दिल भी निकला पत्थर हम दोनों में बनती कैसे एक था शीशा दूजा पत्थर शीशा तो कमज़ोर बड़ा था फिर भी कैसे टूटा पत्थर सब के हिस्से हीरे मोती मेरे हिस्से आया पत्थर पारस था वो तुम ने जाना सब ने जिस को समझा पत्थर कल तक फूल थे जिन हाथों में उन हाथों में आज था पत्थर
Varun Anand
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ख़ुद अपने ख़ून में पहले नहाएा जाता है वक़ार ख़ुद नहीं बनता बनाया जाता है कभी कभी जो परिंदे भी अन-सुना कर दें तो हाल दिल का शजर को सुनाया जाता है हमारी प्यास को ज़ंजीर बाँधी जाती है तुम्हारे वास्ते दरिया बहाएा जाता है नवाज़ता है वो जब भी अज़ीज़ों को अपने तो सब से बा'द में हम को बुलाया जाता है हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को हमीं को बा'द में रास्ता दिखाया जाता है
Varun Anand
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ये शोख़ियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम हमारी आँख है पैवस्त एक सहरा में अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम हर एक लफ़्ज़ के मा'नी तलाशते हो तुम हर एक लफ़्ज़ का मा'नी कहाँ से लाएँ हम चलो बता दें ज़माने को अपने बारे में कि रोज़ झूटी कहानी कहाँ से लाएँ हम
Varun Anand
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