आबियारी से हमारी बाग तब उन का खिला था पतझड़ों सी ज़िन्दगी को साथ ले जब वो मिला था रौशनी देकर उसे हम तीरगी में जी रहे हैं सुब्ह मेरी ले गया वो शब के जैसे जो मिला था
sherKuch Alfaaz
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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ज़िन्दगी छीन ले बख़्शी हुई दौलत अपनी तू ने ख़्वाबों के सिवा मुझ को दिया भी क्या है
Akhtar Saeed Khan
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
Charagh Sharma
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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