तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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जो लोग ख़ुद न करते थे होंठों से पान साफ़ पलकों से कर रहे हैं तेरा पायदान साफ़
Charagh Sharma
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उँगलियों पर गिने जा सकते हैं अब अच्छे लोग उँगलियों में गर अँगूठे न गिनो भी तो भी
Charagh Sharma
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बनाओ ताजमहल के ब-जाए ताश महल तमाम उम्र मुहब्बत करो गिराओ बनाओ
Charagh Sharma
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मैं होश-मंद हूँ ख़ुद भी सो मेरी ग़ज़लों में न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है
Charagh Sharma
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