आदत कि पहरों चाँद-सितारों को देखना इक दिन ज़मीं से दूर करेगी हमें-तुम्हें
Related Sher
पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
129 likes
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
129 likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
166 likes
मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
285 likes
More from Vikas Rajput
तू ने जिस भाव से चादर हमें पकड़ाई है अब यहाँ पाँव पसारे भी नहीं जा सकते
Vikas Rajput
3 likes
विकास खिड़कियों से देख आए आसमाँ तुम कशिश थी फूल की तो हौसला भी होना था
Vikas Rajput
3 likes
तुम ने ही इस को और भी प्यारा बनाया है जिस राब्ते को मैं ने सहारा बनाया है
Vikas Rajput
2 likes
हिरनी जिस तेजी से दौड़ी है किसी आहट पर उस की रफ़्तार को रफ़्तार न समझा जाए
Vikas Rajput
3 likes
मेरी ग़ज़ल के झाँसे में जानू न आइए ये शौक़ है मेरा कोई अहद-ए-वफ़ा नहीं
Vikas Rajput
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Vikas Rajput.
Similar Moods
More moods that pair well with Vikas Rajput's sher.







