आदमी रोता है हिज्र में रात-दिन अच्छा जी औरतें अश्कों में चून तक माँडती है समझ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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दिल में अजब सी बेकली है साक़ी चल भर दे गिलास पूरा नहीं तो पौना चल आधा सवा इक घूँट प्लीज़
Chhayank Tyagi
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मैं तुझ को छोड़ दूँ जब तब तो तू मान लेगी अब फूलों को मसलना आदत सी बन गई है
Chhayank Tyagi
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उस को अच्छे लगते हैं गुल फूल काफ़ी इस लिए ही खेलती है वो दिलों से
Chhayank Tyagi
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संग रह जाते थे पानी पे ही लिख के राम का नाम कृष्ण के छूने से यकसाँ बाँस बन जाते थे मुरली
Chhayank Tyagi
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हमारी ये कहानी भी यक़ीनन इक ग़ज़ल है है मतला दोस्ती जिस का है मक़्ता ये मोहब्बत
Chhayank Tyagi
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