आईना क्यूँँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
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मैं तुम्हें बद्दुआएं देता हूँ ताकि तुम मेरा दर्द जान सको तुम जिसे चाहते हो मर जाए और तुम उस के बा'द ज़िंदा रहो
Afkar Alvi
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे कब कहा है गले लगाओ मुझे तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
Zia Mazkoor
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वो जो गीत तुम ने सुना नहीं मेरी उम्र भर का रियाज़ था मेरे दर्द की थी वो दास्ताँ जिसे तुम हँसी में उड़ा गए
Amjad Islam Amjad
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कोई वीरानी सी वीरानी है दश्त को देख के घर याद आया
Mirza Ghalib
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सब कहाँ कुछ लाला-ओ-गुल में नुमायाँ हो गईं ख़ाक में क्या सूरतें होंगी कि पिन्हाँ हो गईं
Mirza Ghalib
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बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर 'असद' जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा
Mirza Ghalib
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यही है आज़माना तो सताना किस को कहते हैं अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तिहाँ क्यूँँ हो
Mirza Ghalib
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अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यूँँ तेरा घर मिले
Mirza Ghalib
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