आज अपने पराए हुए हैं लोभ हलचल मचाए हुए हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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यक़ीं किस तरह कोई उनपे करेगा वो खाते हैं झूठी क़सम देखते हैं नहीं जिस की ता'बीर कोई जहाँ में वही ख़्वाब हम ऐ सनम देखते हैं
Navneet krishna
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ज़ख़्म रिसता है दवाओं का असर होने तक हम न मिट जाएँ कहीं उन को ख़बर होने तक
Navneet krishna
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इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
Navneet krishna
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लाख दुश्मन करें यहाँ कोशिश सत्य हैं हम तो हम को काल कहाँ
Navneet krishna
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मेरे हमराज़ मिला दे मुझ को उस की तस्वीर दिला दे मुझ को मुद्दतें हो गई उन को देखे कोई ले जाके मिला दे मुझ को
Navneet krishna
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