आज कल के नौजवानों के लिए इश्क़ बस जिस्मों का कारोबार है
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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याद है माज़ी का हर लम्हा मुझे अच्छे से मैं ने जब पहली दफ़ा माँ की दुआएँ ली थीं उस ने होंठों से मिरा चूमा था माथा बढ़कर उस ने हाथों से शजर मेरी बलाएँ ली थीं
Shajar Abbas
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या इलाही गाँव के लड़कों की ख़ैर आज अपनी बाम पे आई है वो
Shajar Abbas
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ज़िंदगी उजड़े हुए घर की तरह लगती है बाप का साया अगर सर पे नहीं होता है
Shajar Abbas
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वो मेरी चूम के पेशानी मुझ सेे कहने लगी 'शजर' तुम्हारा मेरा साथ बस यहीं तक था
Shajar Abbas
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ये शे'र बाद-ए-शजर तुर्बत-ए-शजर पे लिखो सफ़र सफ़र में सफ़र ज़िंदगी का ख़त्म हुआ
Shajar Abbas
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