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वो मेरी चूम के पेशानी मुझ सेे कहने लगी 'शजर' तुम्हारा मेरा साथ बस यहीं तक था

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था

Tehzeeb Hafi

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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या

Jaun Elia

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आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोड़ा सा मीठा तेज़ है

Tehzeeb Hafi

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

Ali Zaryoun

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