आज सबने यही बस सुनाया हमें आप पैदा हुए आप का शुक्रिया
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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अब हमें देख के लगता तो नहीं है लेकिन हम कभी उस के पसंदीदा हुआ करते थे
Jawwad Sheikh
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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ
Ali Zaryoun
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ज़ोर से बोलूँगा तो शैतान सुन लेगा मुझे और अगर चीखूँ नहीं तो वो सुनेगा किस तरह
Maher painter 'Musavvir'
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सभी करिश्में नज़र न आएंँगे आँख से ही मिसाल के तौर पर ख़ुदा को ही देख लो तुम
Maher painter 'Musavvir'
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जो घाव तू ने दिया है अज़ीज़ है हम को जो उस पे बाँध रखा है रुमाल भी प्यारा
Maher painter 'Musavvir'
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है गुहर हाथों में उस के साँस लेकिन रुक गई इक गुहर के वास्ते दूजी गुहर खोनी पड़ी
Maher painter 'Musavvir'
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प्यादों के रंग अलग है मगर जाएँगे सभी शतरंज ख़त्म होने पे बक्से में एक ही
Maher painter 'Musavvir'
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