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आज ये दिल उदास हो जैसे या कोई देवदास हो जैसे रात है कुछ बहुत उजाले हैं तुम मेरे आस पास हो जैसे

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ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी

Hameed Sarwar Bahraichi

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हम तो रोते रहे, गिड़गिड़ाते रहे क्या सितम हम सेे वो दूर जाते रहे मेरी आँखें थीं नम जैसे सैलाब हो फिर भी अपना लहू हम बहाते रहे

Hameed Sarwar Bahraichi

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कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं वो छोड़ कर के गया जिस मुक़ाम पर मुझ को उसी मुक़ाम को मंज़िल बना चुका हूँ मैं

Hameed Sarwar Bahraichi

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न ये पागल सा मजनू है, न अब फ़रहाद लगता है पस-ए-मुश्किल, हमारा दिल बड़ा ही शाद लगता है

Hameed Sarwar Bahraichi

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कुछ बचा ही नहीं शिकायत में साँस खलने लगी है फ़ुरक़त में तंज़ करते हैं उन की बातों पर बा'द रोते हैं हम नदामत में

Hameed Sarwar Bahraichi

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