ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कैसा मंज़र था उन की आँखों में इक समुंदर था उन की आँखों में
Hameed Sarwar Bahraichi
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हमारे ख़्वाब समुंदर में डूब जाते हैं सो अपने ख़्वाब में हम कश्तियाँ बनाते हैं
Hameed Sarwar Bahraichi
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याद बस याद ही नहीं रहती इस में भी तू यहीं कहीं रहती मैं तेरे पास भी नहीं रहता तू मगर दूर भी नहीं रहती
Hameed Sarwar Bahraichi
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जो भी जाता है वहाँ वो लौट कर आता नहीं या'नी कुछ तो मसअला है इश्क़ के बाज़ार में
Hameed Sarwar Bahraichi
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जो बिन माँगे मिल जाए वो है मुहब्बत ख़ुशामद करोगे तो ख़ैरात होगी
Hameed Sarwar Bahraichi
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