आकाश में भी गूँजते हैं गीत प्यार के आओ पिया कि आए हैं अब दिन बहार के ये दिन वहीं हैं जिन का हमें इंतिज़ार था मौसम गुज़र गए हैं सभी इंतिज़ार के
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा
MIR SHAHRYAAR
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बहुत क़रीब भी हैं दूर दूर भी हैं बहुत तू मह है बाम पे मैं ज़ेर-ए-बाम हूँ जानाँ
MIR SHAHRYAAR
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गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
MIR SHAHRYAAR
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फिर हो रही है रुख़्सत उस की महक यहाँ से ये कमरा ये जहाँ फिर सुनसान होने को है
MIR SHAHRYAAR
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सर-ए-बाम था मेरे ख़्वाबों का चाँद आज महकते रहे सारे मन के दरीचे बरसते रहे यादों के गहरे बादल खुले थे सहर तक सुख़न के दरीचे
MIR SHAHRYAAR
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