सर-ए-बाम था मेरे ख़्वाबों का चाँद आज महकते रहे सारे मन के दरीचे बरसते रहे यादों के गहरे बादल खुले थे सहर तक सुख़न के दरीचे
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा
MIR SHAHRYAAR
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मैं कब तक तितलियों के साथ झूमूँ बिछड़ मुझ से मुझे हैरान तो कर
MIR SHAHRYAAR
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किस तरह हम बिखर गए जानाँ सब दुआ बे-असर गए जानाँ मैं तो ख़ुश था मगर ये चारा-गर मुझ को बर्बाद कर गए जानाँ
MIR SHAHRYAAR
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आँखें भी और ख़्वाब भी रख लो ये लो ख़ुशबू गुलाब भी रख लो
MIR SHAHRYAAR
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गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
MIR SHAHRYAAR
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