sherKuch Alfaaz

आँखें भी और ख़्वाब भी रख लो ये लो ख़ुशबू गुलाब भी रख लो

More from MIR SHAHRYAAR

जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा

MIR SHAHRYAAR

0 likes

गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो

MIR SHAHRYAAR

0 likes

ज़माने से पड़े सूखे गुलाब देखोगी कोई किताब पढ़ोगी तो याद आऊँगा कभी मोहब्बतों की उलझी उलझी राहों पर जो तन्हा तन्हा चलोगी तो याद आऊँगा

MIR SHAHRYAAR

2 likes

तुझ को पहचानना ही मुश्किल है ये तेरा आईना नहीं मैं हूँ ये जो रहती है दिल में बेचैनी कोई और सानेहा नहीं मैं हूँ

MIR SHAHRYAAR

2 likes

किस तरह हम बिखर गए जानाँ सब दुआ बे-असर गए जानाँ मैं तो ख़ुश था मगर ये चारा-गर मुझ को बर्बाद कर गए जानाँ

MIR SHAHRYAAR

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on MIR SHAHRYAAR.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with MIR SHAHRYAAR's sher.