आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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याद करने की सहूलत तो मुयस्सर थी मगर भूल जाना ही उसे मैं ने ज़रूरी समझा
Salman ashhadi sahil
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फिर यूँँ हुआ कि शहर की रौनक़ को छोड़कर हम ऐसे लोग गाँव की जानिब निकल पड़े
Salman ashhadi sahil
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उस की चाहत में भी इख़लास नहीं था शायद और कुछ हम भी उसे दिल से नहीं चाह सके
Salman ashhadi sahil
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मैं किस से बात करूँँ किस के साथ दुख बाँटूं मिरे मिज़ाज का कोई नहीं है दुनिया में
Salman ashhadi sahil
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बहुत अफ़सोस होता है ख़ज़ाने को लुटा बैठे मोहब्बत जिस से करते हैं उसी को हम गँवा बैठे
Salman ashhadi sahil
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