आख़िर क्या रंजिश है नींद की आँखों से कि नहीं आती बिस्तर के हर कोने में तकिया रख-रख के देख लिया
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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टूटा जब तारा तो आँखें हर एक ने मूँद लीं कोई तो देखता आसमाँ को भी रोते हुए
Prakash Pandey
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हुस्न का ज़ोम है आप को बे-हिसाब नज़रें ये आप से हट न जाएँ कहीं
Prakash Pandey
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लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
Prakash Pandey
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रख दे जो हाथ दिल पे तो शायद चैन आ जाए नादाँ मेरे दिल तक कोई दवा नहीं जाती
Prakash Pandey
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दे कर लब पे निशान वो पूछा बता कि और क्या है ख़्वाइश तेरी
Prakash Pandey
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