लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया
Zubair Ali Tabish
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ऐसा नहीं बस आज तुझे प्यार करेंगे ता'उम्र यही काम लगातार करेंगे सरकार करेगी नहीं इस देश का उद्धार उद्धार करेंगे तो कलाकार करेंगे
Tanoj Dadhich
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली' अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के
Ali Zaryoun
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टूटा जब तारा तो आँखें हर एक ने मूँद लीं कोई तो देखता आसमाँ को भी रोते हुए
Prakash Pandey
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दे कर लब पे निशान वो पूछा बता कि और क्या है ख़्वाइश तेरी
Prakash Pandey
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रख दे जो हाथ दिल पे तो शायद चैन आ जाए नादाँ मेरे दिल तक कोई दवा नहीं जाती
Prakash Pandey
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चुभ कर मिरे बदन में जो अटके हैं काँटों के टुकड़े ये उस पौधे के हैं जिस का गुलाब मैं ने तोड़ा था
Prakash Pandey
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तय हुआ था बात होगी वस्ल पे बस आँखों से जाने कब होंठों ने होंठों को इशारा कर दिया
Prakash Pandey
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