चुभ कर मिरे बदन में जो अटके हैं काँटों के टुकड़े ये उस पौधे के हैं जिस का गुलाब मैं ने तोड़ा था
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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दे कर लब पे निशान वो पूछा बता कि और क्या है ख़्वाइश तेरी
Prakash Pandey
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आलम में करते हो नुमाइश इस क़दर रंज-ओ-अलम की ये लब नहीं खुलते जो ग़म ना-क़ाबिल-ए-बरदाश्त होता
Prakash Pandey
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मकान-ए-दिल में कहो कोई जाए अब कैसे दर-ए-ज़ुबाँ पे वो ताला लगाए बैठे हैं
Prakash Pandey
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टूटा जब तारा तो आँखें हर एक ने मूँद लीं कोई तो देखता आसमाँ को भी रोते हुए
Prakash Pandey
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लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
Prakash Pandey
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