आलम में करते हो नुमाइश इस क़दर रंज-ओ-अलम की ये लब नहीं खुलते जो ग़म ना-क़ाबिल-ए-बरदाश्त होता
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
More from Prakash Pandey
टूटा जब तारा तो आँखें हर एक ने मूँद लीं कोई तो देखता आसमाँ को भी रोते हुए
Prakash Pandey
2 likes
लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
Prakash Pandey
4 likes
रख दे जो हाथ दिल पे तो शायद चैन आ जाए नादाँ मेरे दिल तक कोई दवा नहीं जाती
Prakash Pandey
4 likes
मकान-ए-दिल में कहो कोई जाए अब कैसे दर-ए-ज़ुबाँ पे वो ताला लगाए बैठे हैं
Prakash Pandey
5 likes
दे कर लब पे निशान वो पूछा बता कि और क्या है ख़्वाइश तेरी
Prakash Pandey
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Prakash Pandey.
Similar Moods
More moods that pair well with Prakash Pandey's sher.







