तय हुआ था बात होगी वस्ल पे बस आँखों से जाने कब होंठों ने होंठों को इशारा कर दिया
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
Prakash Pandey
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दे कर लब पे निशान वो पूछा बता कि और क्या है ख़्वाइश तेरी
Prakash Pandey
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आलम में करते हो नुमाइश इस क़दर रंज-ओ-अलम की ये लब नहीं खुलते जो ग़म ना-क़ाबिल-ए-बरदाश्त होता
Prakash Pandey
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चुभ कर मिरे बदन में जो अटके हैं काँटों के टुकड़े ये उस पौधे के हैं जिस का गुलाब मैं ने तोड़ा था
Prakash Pandey
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टूटा जब तारा तो आँखें हर एक ने मूँद लीं कोई तो देखता आसमाँ को भी रोते हुए
Prakash Pandey
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