आँख में इक अजब सी नमी रह गई तू न था तो लगा कुछ कमी रह गई
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं
Krishnakant Kabk
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मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे तुम उस के दिल का रस्ता नईं बना पाओगे
Krishnakant Kabk
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रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का मैं ने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का
Krishnakant Kabk
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बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है ख़ूब-सूरत होती थी हर शाम तेरे साथ में दोपहर के बा'द अब तो रात आने लगती है
Krishnakant Kabk
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जितनी दफ़ा उसे मेरी याद आती होगी उतनी दफ़ा ग़ज़ल मेरी गुनगुनाती होगी
Krishnakant Kabk
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