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बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है ख़ूब-सूरत होती थी हर शाम तेरे साथ में दोपहर के बा'द अब तो रात आने लगती है
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बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है ख़ूब-सूरत होती थी हर शाम तेरे साथ में दोपहर के बा'द अब तो रात आने लगती है
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