रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का मैं ने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का
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Krishnakant Kabk
@krishnakantkabk
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे तुम उस के दिल का रस्ता नईं बना पाओगे
sherKuch Alfaaz
कैसे हम को अलग करोगे हम इक दूजे के मानी हैं
sherKuch Alfaaz
सब को ही है तकलीफ़ किसी ना किसी से तो तकलीफ़ को बिल्कुल नहीं तकलीफ़ किसी से
sherKuch Alfaaz
हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं
sherKuch Alfaaz
मेरे हाथों से तेरा हाथ इक पल छूट जाता है मुझे अक्सर डरा कर के ये सपना टूट जाता है
sherKuch Alfaaz
मैं कहूँ भी तो कैसे कहूँ अब ग़ज़ल शे'र भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह
sherKuch Alfaaz
बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है
sherKuch Alfaaz
जितनी दफ़ा उसे मेरी याद आती होगी उतनी दफ़ा ग़ज़ल मेरी गुनगुनाती होगी
sherKuch Alfaaz
शा'इरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हम सेे बस गिटार पर ही लड़की फ़िदा नहीं होती
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